प्रधानमंत्री बिना CJI के चुनाव आयुक्तों को क्यों चुनना चाहते हैं? राहुल गांधी के सरकार से 3 सवाल

संसद में चुनाव सुधारों पर बोलते हुए, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल किया कि वह चुनाव आयोग के प्रमुख और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए ज़िम्मेदार पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाने पर इतनी आमादा क्यों है?

राहुल गांधी ने पूछा, “मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से क्यों हटाया गया? क्या हमें मुख्य न्यायाधीश पर विश्वास नहीं है?”

राहुल गांधी ने कहा कि वह विपक्ष के नेता के रूप में चयन समिति का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उनकी कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि उनकी संख्या कम है, एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी और दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं।

उन्होंने कहा, “मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से क्यों हटाया गया? इसके पीछे क्या मंशा थी? उस कमरे में मेरी कोई आवाज नहीं है।”

राहुल गांधी 2023 के उस कानून का ज़िक्र कर रहे थे जिसके तहत राष्ट्रपति को नियुक्तियों की सिफ़ारिश करने वाले तीन सदस्यीय चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है, जबकि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता इसके अन्य दो सदस्य हैं।

अगले सवाल पर आगे बढ़ते हुए, राहुल गांधी ने पूछा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक और कानून क्यों पारित किया गया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को अपनी आधिकारिक क्षमता में की गई कार्रवाइयों के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।

वह मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 16 का हवाला दे रहे थे, जो चुनाव आयोग प्रमुख और चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए लिए गए निर्णयों से उत्पन्न होने वाली किसी भी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करता है।

इसके बाद उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग को नियंत्रित करने का क्या नतीजा निकला? और दावा किया कि चुनाव की तारीखें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अनुकूल तय की जाती हैं।

राहुल गांधी ने लिया संघ का नाम –

राहुल गांधी ने कहा कि देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति आरएसएस के हैं। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि आप चुनाव सुधार पर ही बोलिए, किसी संगठन का नाम मत लीजिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम सभी लोग नेता प्रतिपक्ष को सुनने के लिए ही बैठे हैं। अगर वह विषय पर ही नहीं बोलेंगे, तो क्यों समय खराब कर रहे हैं सबका?

चुनाव आयोग का सत्ता से तालमेल –

राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष के हंगामे पर कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। शिक्षण संस्थाओं पर कब्जा किया गया है। वीसी की नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं, एक संगठन से जुड़ाव के आधार पर की गई है। सीबीआई, ईडी पर भी एक संस्था से जुड़े लोगों ने कब्जा किया गया है। तीसरी संस्था चुनाव आयोग पर भी एक संस्था का कब्जा है, जो देश में चुनाव को कंट्रोल करती है। मेरे पास इसके सबूत हैं। बीजेपी लोकतंत्र को डैमेज करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है। सीजेआई को सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया। मैं बैठा था, एक तरफ पीएम मोदी और अमित शाह बैठे थे और दूसरी तरफ मैं. किसी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया। दिसंबर 2023 में नियम बदल यह प्रावधान किया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता। यह 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया। सीसीटीवी और डेटा को लेकर नियम बदले गए। सत्ता के साथ चुनाव आयोग का तालमेल है। यह डेटा का सवाल नहीं, चुनाव का सवाल है।

हरियाणा-महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी –

राहुल गांधी ने कहा कि एक ब्राजीलियन महिला की फोटो 22 बार छपी है वोटर लिस्ट पर हरियाणा में। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आप नेता प्रतिपक्ष हैं, गरिमा से बोलेंगे तो ठीक है, नहीं तो इस तरह से सदन नहीं चलेगा। आप अपने सदस्यों को गरिमा समझाइए। विरोध का तरीका होता है, लेकिन ये तरीका उचित है क्या?

राहुल गांधी ने कहा कि सीईसी को कंट्रोल करने का क्या मतलब है। वह तस्वीरें यहां नहीं दिखाना चाहते, लेकिन यह चुनाव की चोरी का सवाल है। उन्होंने चुनाव आयोग पर प्रूफ के साथ अपने सीधे सवालों के जवाब नहीं देने के लिए चुनाव आयोग को घेरा और कहा कि बिहार में एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में एक लाख 22 हजार डुप्लीकेट फोटो छपी हैं। ऐसे कैसे हो गया?

राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव सुधार जरूरी हैं। मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से एक महीने पहले दी जानी चाहिए। सीसीटीवी फुटेज डिस्ट्रॉय करने का नियम भी बदला जाना चाहिए। हमें ईवीएम देखने के लिए दी जाए। वोट चोरी एंटी नेशनल काम है। हम महान लोकतंत्र हैं। सरकार चुनाव सुधार नहीं चाहती।

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