INDIA गठबंधन को एक और झटका देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में आगामी लोकसभा चुनाव सभी सीटों पर अकेले लड़ेगी। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह भविष्य में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में फिर से शामिल हो सकते हैं। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किए बिना अपनी योग्यता के आधार पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने एनडीए में लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया।
बता दें कि जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में थे तब नेशनल कॉन्फ्रेंस एनडीए का हिस्सा थी।
अनुभवी जम्मू-कश्मीर नेता ने कहा कि भारत गठबंधन के घटकों के साथ सीट साझा करने की बातचीत विफल हो गई है। अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, “जहां तक सीट बंटवारे का सवाल है, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने बल पर चुनाव लड़ेगी। इसमें कोई दो राय नहीं है।”
अब्दुल्ला ने कहा है कि मुझे देश बनाने के लिए जो करना पड़ेगा, वो करूंगा। वहीं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात के सवाल पर कहा कि जब वो बुलाएंगे तो कौन बात नहीं करना चाहेगा। एनडीए में शामिल होने पर उन्होनें कहा, हम भविष्य में एनडीए में शामिल होने की संभावनाओं को नकार नहीं सकते। उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक में सीटों की शेयरिंग पर बातचीत फेल हो गई, जिसकी वजह से ये फैसला लिया है।
वहीँ अब्दुल्लाह के इस बयान पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “बातचीत चल रही है। हर पार्टी की अपनी सीमाएं हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे।”
इंडिया ब्लॉक और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच दरारें पिछले महीने से ही दिखने लगी थीं। जनवरी में, पूर्व सीएम ने कहा था कि अगर सीट-बंटवारे का फॉर्मूला जल्द तय नहीं किया गया तो कुछ विपक्षी दल एक अलग गठबंधन बना सकते हैं।
पिछले महीने, जम्मू क्षेत्र में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के कई शीर्ष नेता भाजपा में शामिल हुए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में, भाजपा और अब्दुल्ला की जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन-तीन सीटें जीतीं थीं।
लगभग 25 पार्टियों के गठबंधन, इंडिया ब्लॉक को अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे पर आम सहमति तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
इंडिया ब्लॉक को ताजा झटका आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की उस घोषणा के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी पंजाब और चंडीगढ़ की सभी 14 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दिल्ली में पार्टी ने कांग्रेस को सात लोकसभा सीटों में से सिर्फ एक सीट की पेशकश की है।
आप की यह घोषणा टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान के कुछ सप्ताह बाद आई जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव भी अकेले लड़ेगी और उन्होंने अपने सभी सीट-बंटवारे प्रस्तावों को खारिज करने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था।
