संत बनाम उदयनिधि स्टालिन: अयोध्या के संत ने डीएमके नेता को दी जान से मारने की धमकी, परमहंस आचार्य ने कहा- ‘मैं इनाम बढ़ाऊंगा’

अयोध्या के एक संत परमहंस आचार्य ने सोमवार को ‘सनातन धर्म’ के खिलाफ उनकी कथित टिप्पणी पर डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन का सिर काटने वाले को 10 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। अब मंगलवार को परमहंस आचार्य ने पहले घोषित 10 करोड़ रुपये के इनाम को बढ़ाने का वादा किया है। बता दें कि डीएमके नेता ने सनातन धर्म को खत्म करने की आवश्यकता के बारे में बात करके विवाद खड़ा कर दिया था और इसकी तुलना “मलेरिया” और “डेंगू” से की थी।

सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन को जान से मारने की धमकी दोहराते हुए, अयोध्या के संत ने कहा, “अगर 10 करोड़ रुपये उनका (उदयनिधि) सिर कलम करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, तो मैं इनाम बढ़ा दूंगा, लेकिन यह ‘सनातन धर्म’ का अपमान है…. ‘बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’।”

यह कहते हुए कि उदयनिधि ने सनातन धर्म के खिलाफ अपनी टिप्पणी से देश के 100 करोड़ लोगों की भावनाओं को आहत किया है, अयोध्या के संत ने द्रमुक मंत्री से माफी की मांग की है।

परमहंस आचार्य ने कहा, “देश में जो भी विकास हुआ है वह ‘सनातन धर्म’ के कारण हुआ है। उन्हें अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने देश के 100 करोड़ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।”

इस बीच, तमिलनाडु के मंत्री को जान से मारने की धमकी को लेकर वेल्लोर में डीएमके समर्थकों ने मंगलवार को अयोध्या के संत परमहंस आचार्य का पुतला जलाया।

इस बीच भारत के 260 से ज्यादा प्रतिष्ठित नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) को चिट्ठी लिखकर उनसे ‘सनातन धर्म’ पर द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। इस चिट्ठी में कहा गया है कि स्टालिन के बयान से सनातन धर्म पर विश्वास करने वाले भारत के आम नागरिकों के दिल और दिमाग में गुस्सा भरा है। इस चिट्ठी के हस्ताक्षरकर्ताओं में तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के. श्रीधर राव, गुजरात के पूर्व जज और लोकायुक्त एसएम सोनी समेत कुल 14 जजों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा कई पूर्व नौकरशाहों, राजदूतों और रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के नाम भी हैं।

इस चिट्ठी को 262 लोगों ने लिखा है। इसमें कहा गया है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वाले लोग स्टालिन द्वारा की गई टिप्पणियों से बहुत चिंतित हैं और ये टिप्पणियां निर्विवाद रूप से भारत की एक बड़ी आबादी के खिलाफ हेट स्पीच के जैसी है। यह भारत के संविधान की मूल भावना पर प्रहार करती है, जिसमें भारत की एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में परिकल्पना की गई है। पत्र में कहा गया है कि देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की रक्षा करने के लिए इस पर कदम उठाने की आवश्यकता है।

मालूम हो कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन द्वारा अपनी टिप्पणी पर अड़े रहने के बाद संत का यह इनाम वाला बयान आया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हिंदू समुदाय को निशाना नहीं बनाया। इससे पहले, उदयनिधि स्टालिन ने संत पर पलटवार करते हुए सवाल किया था कि क्या ये नकली संत हैं।

संत ने इससे पहले सोमवार को एक वीडियो जारी किया था जिसमें उन्हें एक हाथ में उदयनिधि का पोस्टर और दूसरे हाथ में तलवार पकड़े हुए दिखाया गया था। डीएमके मंत्री का प्रतीकात्मक सिर काटने का मंचन करते हुए, उन्हें पोस्टर में आग लगाते हुए भी देखा गया। साधु ने डीएमके नेता का सिर कलम करने वाले को 10 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *