कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कांटेरावा स्टेडियम में लोगों की भारी भीड़ के बीच शपथ लिया। इसी के साथ सिद्धारमैया ने दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जबकि डीके शिवकुमार ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उन्हें बधाई दी और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस दौरान मंच पर विपक्षी एकजुटता भी दिखी।
डॉ जी परमेश्वर, केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज और एमबी पाटिल ने नव-निर्वाचित कर्नाटक सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और चित्तपुर से विधायक प्रियांक खड़गे ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। वह 2016 में सिद्धारमैया सरकार में मंत्री थे। 1998 में उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की थी। वह 38 साल की उम्र में मंत्री बने। उन्होंने विधानसभा चुनाव में राहुल और प्रियंका से कहीं ज्यादा 42 रैलियां की थीं। विधायक सतीश जारकीहोली, रामलिंगा रेड्डी और जमीर अहमद को भी शपथ दिलाई गई है। इसके साथ ही 10 मंत्री पद भरे गए हैं। कांग्रेस आलाकमान को शपथ लेने के लिए 24 अन्य मंत्रियों को चुनना है और विभागों का आवंटन करना है।
सतीश जारकीहोली KPCC के कार्यकाली अध्यक्ष हैं। पूर्व वन पर्यावरण मंत्री रहे हैं। वह नायक समुदाय से आते हैं। वह तीन बार मंत्री रह चुके हैं। चीनी मिल समेत कई स्कूलों के मालिक हैं। उन्होंने 2008 में कांग्रेस जॉइन की थी। वहीं एमबी पाटील कद्दावर लिंगायत नेता हैं। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं। 2013 में सिंचाई मंत्री रह चुके हैं। वह सिद्धारमैया के बेहद करीबी हैं।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक की जनता को मैं दिल से और कांग्रेस पार्टी की ओर से धन्यवाद करता हूं। आपने पूरी तरह कांग्रेस पार्टी को समर्थन दिया। पिछले 5 सालों में आपने कौन सी मुश्किलें सही यह आप और हम जानते है। मीडिया में लिखा गया कि यह चुनाव कांग्रेस पार्टी क्यों जीती। इस जीत का सिर्फ एक कारण है और वह है कांग्रेस कर्नाटक के गरीबों, पिछड़ों, दलितों के साथ खड़ी हुई। उन्होंने कहा- हमने यात्रा में कहा था नफरत को मिटाया और मोहब्बत जीती। नफरत के बाज़ार में कर्नाटक ने लाखों मोहब्बत की दुकानें खोली है।
राज्य के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, मक्कल नीडि माईम के प्रमुख कमल हसन, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल हुए।
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार भी शामिल हुए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ एकता का भी प्रदर्शन किया।
इससे पहले कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री मनोनीत डीके शिवकुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का बेंगलुरु में स्वागत किया।
मालूम हो कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में मिली जीत ने कांग्रेस में नई ऊर्जा भर दी है। ऐसे में पार्टी सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण को भव्य बनाकर विपक्षी एकता का भी संकेत देना चाहती थी। कांग्रेस ने समारोह में शामिल होने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों के नेताओं को न्योता भेजा था। हालांकि कांग्रेस ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के सीएम केसीआर, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी, ओडिशा के मुख्यमंत्री के अलावा बसपा चीफ मायावती और बीजद चीफ नवीन पटनायक को नहीं बुलाया।
