नई दिल्ली: विगत 2 वर्षों से देश की जो हालात है इससे कोई भी व्यक्ति अछूता नहीं है और ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो इससे प्रभावित ना हुआ हो। परंतु इन परिस्थितियों के तहत भी कुछ न कुछ रोजगार के कार्यक्रम चलते रहे इसी दौरान नोएडा एक्सप्रेसवे पर स्थित ( Zinedu Classes Pvt Ltd. – Apni Kaksha ) जिनायडू क्लासेस प्राइवेट लिमिटेड नामक संस्था के द्वारा “अपनी शिक्षा” नामक ब्रांड Apni Kaksha पर आपदा में अवसर का लाभ उठाने का आरोप लगाती एक गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायत कर्ता का आरोप है कि उसको जबरन नौकरी से निकाला गया उसके साथ मारपीट की गई और दिव्यांग के नाम पर प्रताड़ित किया गया….
आरोपी संस्था कोरोना काल के समय में दूरस्थ शिक्षा देने के नाम पर अपना धंधा चमकाने में लगी है, आजकल देश के लगभग सभी शिक्षण संस्थान बंद है ऐसे समय में यह संस्थान तकनीकी का उपयोग करके दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से तैयारी कर रहे विधार्थियों खास तौर से मेडिकल तथा इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए पढाई में सहायता के नाम पर कोचिंग चला रही हैं। मोटे मुनाफे के बीच इस संस्थान में अंदरखाने कुछ ठीक नहीं है।
जिनायडू क्लासेस प्राइवेट लिमिटेड ( Zinedu Classes Pvt Ltd. Apni Kaksha ) पर आरोप लगाने वाला खुद व्यक्ति (IIM अहमदाबाद तथा IIT रुड़की )से शिक्षा प्राप्त हैं, इस व्यक्ति को ये कंपनी अपने गलत मंसूबे पूरे करने के लिए इसका शैक्षणिक बैकग्राउंड इस्तेमाल करने के लिए अपने अपने यहां नौकरी पर रखती हैं और जैसे ही कंपनी का काम स्ट्रीम लाइन होना शुरू होता है, कंपनी इस व्यक्ति को धक्के मार कर बाहर कर देती बल्कि उसके पैसे भी हड़प जाती हैं।
ऐसा ही एक प्रकरण नोएडा में देखने को मिला है। तक्षक पोस्ट ने दोनों पक्षों से बात की दोनों पक्षों की बात से एक बात तो स्पष्ट है कि कम्पनी की भूमिका संदिग्ध है। जे नायडू क्लासेस प्राइवेट लिमिटेड के सी ई ओ ने जो बात कही कि व्यक्ति शारीरिक अपंग है…
लेकिन इस बात की जांच के लिए हमारी टीम की तरफ से जब पीड़ित से बात की गई और जो आरोप कंपनी की तरफ से लगाये गये वो गलत निकला पीड़ित कोई हियरिंग डिवाइस नहीं इस्तेमाल कर रहे थें। बल्कि मोबाइल रेडिएशन से बचने के लिए डॉ की सलाह पर अमल कर रहे थे। ये किसी भी तरह के शारीरिक अक्षमता की कैटेगरी में नहीं आता।
क्योंकि 6 फ़ीट की दूरी से बात करने वाला व्यक्ति दिव्यांग नहीं हो सकता। ये सिर्फ और सिर्फ मक्कारी है इस कंपनी की जिसने धोखे से इस पीड़ित को ना सिर्फ नौकरी से बाहर निकाला बल्कि विरोध करने पर मार पिटाई भी की।
Takshaka Post को पड़ताल में पता चला कि पीड़ित बिना किसी उपकरण पीड़ित सुनने में सक्षम है और जिनायडू क्लासेस प्राइवेट लिमिटेड के CEO की बात पूर्णतया मिथ्या और गैरजरूरी है। कंपनी ने अपने ऑफर लेटर से इतर लेबर लॉ का भी उलंघन करते हुये इस पीड़ित को थी उसी दिन बाहर का रास्ता निकाला जिस दिन कंपनी में इस व्यक्ति को ठीक तीन महीने पूरे हुये ….
वैसे भी किसी भी संस्थान को सामान्य व्यक्ति को दिव्यांग बता कर ऐसे आरोप लगाना अपमानित करना मानवाधिकार के तहत गलत है। पीड़ित किसी भी रूप से दिव्यांग नहीं हैं, स्वस्थ है तथा शारीरिक व् मानसिक रूप से अपने कार्य को करने में सक्षम है। नियोक्ता का यह कहना भी अजीब सा लगा की IIT और IIM जैसे संस्थान से शिक्षा प्राप्त लोग भी अक्षम होते है फिर यह देश किस और कौन से संस्थान पर यकीन करें…..

सबसे बड़ी बात यह है कोई भी किसी भी कर्मचारी का शोषण करें और उसके पारिश्रमिक का पैसा मार दें ये हनन है लेबर लॉ का और मानवाधिकार का उल्लंघन है।
विगत दो-तीन महीनों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा ये व्यक्ति अपने अधिकार के लिए कहा जाये ?? इसको न्याय कैसे मिले ? क्या ये संस्थान बड़े सफेदपोश और नेेेताओ का अड्डा है !

