वाराणसी: कला मेला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर टी एन सिंह के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कला मेला में लगभग 40 स्टाल लगाए गए हैं स्टॉल में ललित कला विभाग मुख्य परिसर गंगापुर परिसर धीरेंद्र महिला पीजी कॉलेज जीवनदीप महाविद्यालय वनिता पॉलिटेक्निक जयपुरिया स्कूल सुपर सिल्क कंपैरेटिव सोसायटी की तरफ से स्टॉल लगाए गए है।इन स्टालो पर बनारसी सिल्क सारी दुपट्टा टप्पेटा साड़ी सिल्क के अतिरिक्त आर्ट एंड क्राफ्ट टेराकोटा मूर्ति वेस्ट मटेरियल मेहंदी नेल आर्ट बनारसी लोक कला के अंतर्गत बनने वाले लकड़ी के खिलौने तथा खाने पीने के लिए गुजराती एवं चाइनीस खाद्य स्टॉल का भी प्रावधान किया गया है ललित कला विभाग की तरफ से कला मेला में छात्र-छात्राओं द्वारा जनजातीय कला के अंतर्गत कुल देवी देवता महात्मा गांधी भारत माता एवं शिव प्रसाद गुप्त जीके सुंदर कलाकृति बनाई गई है इसके साथ ही सिंधु घाटी की सभ्यता से प्राप्त नर्तकी ,शहीद स्मारक हंस पर सवार सरस्वती जी की झांकियां सजाई गई है बड़े ही सराहनीय एवं आकर्षण का केंद्र है कला मेला के आयोजन के अवसर पर सायं काल सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है। कार्यक्रम का शुरुआत गणेश वंदना सेठ एमआर जयपुरिया इसके तत्पश्चात उस्ताद फतेह अली खान की शहनाई उनके साथ तबले पर ललित पंडित हैं जिन्होंने की साथ दिया साथ ही पूजा राय का गायन से श्रोताओं का मन मुग्ध कर दिया। कला मेला में आए हुए अतिथियों का कंप्रोमाइज नाटक के माध्यम से बनारस यूथ थियेटर की ओर से की ओर से इकबाल नियाजी द्वारा लिखी गई नाटक एक व्यक्ति और उसकी अंतरात्मा की कहानी पर आधारित है जो लोगों को खने पर मजबूर किया इस नाटक में एक जिंदगी की कहानी है जिससे व्यक्ति समझौता करता है और समझौते के तहत अपने आपको बेच देता है इस नाटक के निदेशक अर्पित सिधोरे हैं ।नाटककार उत्कर्ष उपेंद्र सहस्त्रबुद्धे ,अरुणा राय, उत्कर्ष उपेंद्र, विकास ,
हितेषी चौहान आदि है
कार्यक्रम में सर्वश्री सुनील कुमार विश्वकर्मा कार्यक्रम संयोजक पद्मश्री रजनी कांत द्विवेदी प्रोफेसर योगेंद्र सिंह डॉक्टर संतोष कुमार गुप्ता ,प्रोफेसर कृष्णकांत सिंह ,प्रो,शशि देवी सिंह, प्रोफेसर प्रेमचंद विश्वकर्मा, डॉक्टर रामराज ,डॉ स्नेह लता कुशवाहा ,शालिनी कश्यप ,रजनीश कुमार पांडे ,श्रीमती अलका अस्थाना आदि लोग उपस्थित रहे।
