जाति जनगणना को लेकर दिए राहुल गांधी की ‘एक्स-रे’ टिप्पणी पर अखिलेश यादव ने कसा तंज

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जाति जनगणना की मांग पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की “एक्स-रे” टिप्पणी के बाद उन पर निशाना साधा है। ये INDIA गठबंधन के दो सदस्यों के बीच बढ़ती दरार का एक और संकेत है। राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कि जाति जनगणना एक “एक्स-रे” की तरह होगी जो देश के विभिन्न समुदायों का विवरण देगी, अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक ढंग से पूछा, “जब एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी नई तकनीक की उपलब्धता है तो एक्स-रे क्यों?”

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो उसने जाति जनगणना क्यों नहीं कराई? उन्होंने दावा किया कि सबसे पुरानी पार्टी अब 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले समाज के निचले स्तर के मतदाताओं को लुभाने के लिए देशव्यापी जाति-आधारित सर्वेक्षण की वकालत कर रही है।

यादव ने मध्य प्रदेश के सतना में एक सार्वजनिक बैठक में कहा, “जो लोग एक्स-रे के बारे में बात कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के बाद जाति जनगणना को रोक दिया था… तब लोकसभा में सभी दल जाति जनगणना की मांग कर रहे थे, तो उन्होंने जाति जनगणना नहीं कराई। वे आज ऐसा क्यों करना चाहते हैं? क्योंकि वे जानते हैं कि उनका पारंपरिक वोट बैंक उनके साथ नहीं है।”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सभी पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासी जानते हैं कि उन्होंने [कांग्रेस] आजादी के बाद उन्हें धोखा दिया। इसलिए इस बार वे हार जाएंगे।”

दरअसल, राहुल गांधी ने तेलंगाना में कहा था कि, देश में सबसे बड़ा मुद्दा जाति जनगणना को लेकर है। उन्होंने इसे “एक्स-रे” बताते हुए कहा था कि “ये दलितों, आदिवासियों और ओबीसी की स्थिति पर प्रकाश डालेगा। साथ ही यह भी निर्धारित करेगा कि देश का फंड किस आधार पर वितरित किया जा रहा है।”

सपा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि आधार कार्ड तंत्र की उपलब्धता के कारण जाति जनगणना तीन महीने में पूरी की जा सकती है। उन्होंने पूछा, “जातियों की गिनती तीन महीने में की जा सकती है। सारा डेटा उपलब्ध है। सभी के पास आधार कार्ड हैं। इसमें समय क्यों लगेगा?”

बता दें कि मध्य प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर विवाद के बाद अखिलेश यादव एक समय सहयोगी रही कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। पिछले हफ्ते, उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करना चाहती है और दलितों और पिछड़े वर्गों पर केंद्रित ‘पीडीए’ नामक तीसरे मोर्चे की फिर से मांग की है।

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