चीन द्वारा जारी नए मानचित्र को बहुत गंभीर मुद्दा बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय सीमा पर चीन की गतिविधियों पर बोलने का आह्वान किया। इस नए मानचित्र में ड्रैगन ने भारतीय क्षेत्रों को शामिल किया हुआ है। राहुल ने कहा, ”प्रधानमंत्री को चीन पर कुछ कहना चाहिए।” कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए झूठ बोला कि ‘लद्दाख का एक इंच भी चीन ने नहीं लिया है।’
राहुल ने कहा, “मैं वर्षों से कह रहा हूं कि पीएम ने जो कहा कि लद्दाख में एक इंच जमीन नहीं गई, वह झूठ है। पूरा लद्दाख जानता है कि चीन ने अतिक्रमण किया है। यह मानचित्र मुद्दा बहुत गंभीर है। उन्होंने जमीन छीन ली है। प्रधानमंत्री को इस बारे में कुछ कहना चाहिए।”
कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को चीन के मानचित्र में दिखाये जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा, अन्य देशों से जुड़े क्षेत्रों का नाम बदलने और उन्हें नक्शों पर दर्शाने के मामले में चीन आदतन अपराधी रहा हैहै। कांग्रेस इस तरह के अवैध सीमांकन या भारतीय क्षेत्रों का नाम बदलने पर कड़ी आपत्ति जताती हैहै। उन्होंने कहा, हम अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहते हैं जिसमें चीन शामिल हैहै। हम वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अमन चैन चाहते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, “हालांकि यह दुखदायी है कि गलवान की घटना के बाद चीन की ओर से धोखेबाजी और आक्रामकता जारी है। पीएम मोदी की ओर से दी गई छूट के कारण ऐसा हुआ, जिन्होंने हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद कहा था कि हमारे क्षेत्र में कोई नहीं घुसा। खड़गे ने कहा, मई 2020 से पहले बनी यथास्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार को इस स्थिति की बहाली से कम किसी चीज में नहीं मानना चाहिए। मोदी सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि एलएएसी में भारतीय क्षेत्र में 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर चीन का अवैध कब्जा समाप्त होना चाहिए।
कांग्रेस नेता और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने भी अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों को बेतुका, अतार्किक और ऐतिहासिक रूप से गलत करार दिया और सरकार से अपील की कि हाल के दिनों में चीन द्वारा अतिक्रमण में कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों पर पुन नियंत्रण पाया जाए। उन्होंने कहा, ”चीनी दावे की बेतुकी बात भारत-चीन सीमा विवाद के इतिहास से स्पष्ट होती है। आज, भारत और चीन के बीच असली मुद्दा यह है कि चीनियों ने कई जगहों पर एलएसी का उल्लंघन किया है। इन परिस्थितियों में सरकार को गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या दिल्ली में एक व्यक्ति – शी जिनपिंग – को शोभा देना भारत के स्वाभिमान के अनुरूप होगा, जिसने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है? इसे खाली करने की जरूरत है… संक्षेप में कहें तो, चीनी मानचित्र बेतुके हैं, वे चीन-भारत सीमा विवाद के इतिहास के साथ मेल नहीं खाते हैं, चीन का अरुणाचल प्रदेश पर कोई दावा नहीं है।”
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, “प्रधानमंत्री को इस पर गौर करना चाहिए। वह हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में गए और चीनी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। अब यह नक्शा सामने आया है। इसलिए, उनसे यह सवाल पूछा जाना चाहिए। हमारा दिल टूटता है। राहुल गांधी ने जो कहा वह सच है कि चीन ने लद्दाख में अतिक्रमण किया है…चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसने की कोशिश कर रहा है। अगर आपमें हिम्मत है तो चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करें…”
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, सीमा पर चीन की तैयारियां सरकार के भीतर खतरे की घंटी बजा रही हैं। इसके बजाय हमारे पास एक प्रधानमंत्री हैं जो शी जिनपिंग से एक बैठक के लिए अपील कर रहे हैं, जहां कभी यथास्थिति बनाए रखने का जिक्र नहीं हुआ। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि चीन अक्साई चिन में भूमिगत सुविधाएं बढ़ा रहा है। भारत की प्रतिक्रिया कमज़ोर और डरपोक नहीं हो सकती। हमें चीन के सामने खड़े होने की जरूरत है। लेकिन हमारे पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो चीन को नाम लेकर नहीं बुला सकता और एक ऐसी सरकार है जो इस विषय पर संसद में सभी चर्चाओं को रोक देती है।
बता दें कि चीन ने सोमवार को “मानक मानचित्र” का नया संस्करण जारी किया, जिसमें अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन क्षेत्र, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को शामिल किया गया है। नए नक्शे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तनाव बढ़ गया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले सप्ताह नई दिल्ली में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है।
