पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव से पहले हो रही हिंसा पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नामांकन के दौरान हुई चुनावी हिंसा का स्वत: संज्ञान लिया है। मानवाधिकार निकाय ने आयोग के महानिदेशक (जांच) को एक विशेष मानवाधिकार पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया है और जमीनी सर्वेक्षण करने के बाद हाल की घटनाओं पर प्रत्यक्ष जानकारी मांगी है।

महानिदेशक को पंचायत चुनाव के दौरान और बाद में राज्य के सभी संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में सूक्ष्म मानवाधिकार पर्यवेक्षकों की तैनाती के लिए आयोग के साक्ष एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

आयोग ने एनएचआरसी के महानिदेशक की सहायता के लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पंचायत चुनावों के दौरान राज्य के भीतर कानून व्यवस्था बनी रहे।

निकाय ने पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के सचिव को एक नोटिस भी जारी किया है, जिसमें पंचायत चुनावों से पहले और बाद में मानवाधिकारों के उल्लंघन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया गया है। कार्रवाई की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। इससे पहले राज्य चुनाव आयुक्त ने पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में नामांकन की वीडियोग्राफी कराने के आदेश दिए है।

राज्य चुनाव आयोग का यह फैसला बंगाल राज्य चुनाव आयुक्त राजीव सिन्हा के शनिवार को राजभवन में पेश होने के बाद आया है। राजीव सिन्हा को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य के आगामी पंचायत चुनावों के लिए नामांकन पत्र जमा करने को लेकर अशांति को लेकर तलब किया था।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एक लिटमस टेस्ट के रूप में देखे जाने वाले पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 8 जुलाई को होंगे और परिणाम 11 जुलाई को घोषित किए जाएंगे।

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