रामनवमी पर हुई हिंसा सरकारों और एजेंसियों की है विफलता: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने देश भर में रामनवमी पर हुई हिंसा और झड़पों पर चिंता व्यक्त की है और केंद्र और राज्य सरकारों से दंगा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है, भले ही उनका धर्म और संबद्धता कुछ भी हो। मौलाना मदनी ने कहा कि पिछले अनुभवों के आलोक में कानून व्यवस्था को और अधिक सतर्क बनाया जाना चाहिए और प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

मदनी ने कहा कि पिछले साल भी इस तरह के अत्याचारों की व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई थी। उन्होंने कहा, “लेकिन सरकारों ने उनसे नहीं सीखा और असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय, उन्होंने एकतरफा गिरफ्तारियों और कार्रवाइयों की पुरानी तस्वीर को कायम रखा।”

उन्होंने कहा कि सासाराम, बिहारशरीफ, नालंदा बिहार, हावड़ा, पश्चिम बंगाल, वड़ोदरा गुजरात, जलगांव, औरंगाबाद, महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर झड़पों की खबरों ने देश के लोगों को गहरी चिंता में डाल दिया है। साथ ही ये भी कहा कि किसी भी धार्मिक उत्सव का मकसद खुशियां मनाना और बांटना होता है, लेकिन हिंसा और झड़प इसके विपरीत है।

मदनी ने कहा कि सरकारों को भविष्य में उन्हें फिर से होने से रोकने के लिए और सक्रिय कार्रवाई के माध्यम से उनके मूल कारण को खत्म करने के लिए घटनाओं पर एक ईमानदार नज़र रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का मानना है कि दंगों के लिए स्थानीय पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- “इसके लिए एक दंगा-रोधी कानून का मसौदा भी तैयार किया गया था, लेकिन यह कानून संसद में पेश नहीं किया जा सका। अगर यह कानून पारित हो जाता तो ऐसी स्थितियों से बचा जा सकता था।’

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