बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, 93 लोगों की मौत, देशव्यापी कर्फ्यू की घोषणा; हसीना सरकार पर लटकी तलवार

राजधानी ढाका सहित बांग्लादेश के कई शहरों में हिंसा की एक ताजा लहर फैल गई है जिसके परिणामस्वरूप 93 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों छात्रों की पुलिस और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं से झड़प हुई। पुलिस ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। बांग्लादेश सरकार ने सोमवार से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू और तीन दिन की सामान्य छुट्टी की घोषणा की है। सरकार ने रविवार शाम 6 बजे से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की है।

15 साल से अधिक समय तक शासन करने के बाद इस साल जनवरी में लगातार चौथी बार सत्ता में लौटीं हसीना के लिए विरोध प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि हसीना की सरकार पतन के कगार पर है क्योंकि प्रदर्शनकारी अब एक मांग पर जोर दे रहे हैं – वो है उनका इस्तीफा।

इस बीच भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक बांग्लादेश की यात्रा न करने की “कड़ी सलाह” दी है और बांग्लादेश में भारतीय अधिकारियों ने अस्थिर स्थिति को देखते हुए नागरिकों से “सतर्क रहने” को कहा है।

भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को पड़ोसी देश की यात्रा न करने को लेकर जारी एडवाइजरी में कहा, “मौजूदा दौर में बांग्लादेश में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अपनी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने और अपने आपातकालीन फोन नंबरों के माध्यम से ढाका में भारतीय उच्चायोग के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।”

इसके अलावा केंद्र सरकार ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है:

+8801958383679
+8801958383680
+8801937400591

https://x.com/MEAIndia/status/1820154782159384692

नवीनतम घटनाक्रम ये हैं:

रविवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ लाठी वगैरह लेकर पहुंची थी। ढाका के बीच स्थित शाहबाग चौराहे पर यह भीड़ जमा हुई तो पुलिस और आंदोलन कारियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। इसके अलावा कई स्थानों व प्रमुख शहरों में भी सड़क पर प्रदर्शनकारी और पुलिस कर्मियों में आमना-सामना हुआ। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख राजमार्गों को ब्लॉक कर दिया। पुलिस के साथ-साथ इस झड़प में सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थक भी थे जिनसे प्रदर्शनकारियों का आमना-सामना हुआ।

प्रदर्शनकारियों में छात्रों के साथ-साथ मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी द्वारा समर्थित कुछ समूह भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने टैक्स और बिल भुगतान न करने की अपील की है और साथ ही रविवार को काम पर न जाने की अपील की थी। प्रदर्शनकारियों ने रविवार को खुले कार्यालयों और प्रतिष्ठानों पर भी हमला किया, जिसमें ढाका के शाहबाग इलाके में एक अस्पताल, बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल यूनिवर्सिटी भी शामिल है। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि ढाका के उत्तरा इलाके में कुछ कच्चे बम विस्फोट किए गए और गोलियों की आवाज सुनी गई।

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने कई गाड़ियों में आग भी लगा दी। ढाका के मुंशीगंज जिले के एक पुलिसकर्मी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “पूरा शहर युद्ध के मैदान में बदल गया है”। विरोध करने वाले नेताओं ने आंदोलनकारियों से खुद को बांस की लाठियों से लैस करने का आह्वान किया था, क्योंकि जुलाई में विरोध प्रदर्शन के पिछले दौर को पुलिस ने बड़े पैमाने पर कुचल दिया था।

बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक, बोगुरा, मगुरा, रंगपुर और सिराजगंज समेत 11 जिलों में मौतें हुईं, जहां अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सदस्य सीधे तौर पर भिड़ गए।

बांग्लादेश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण की कोटा प्रणाली को लेकर पिछले महीने विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज होते गए, सुप्रीम कोर्ट ने कोटा घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया, जिसमें से 3 प्रतिशत सेनानियों के रिश्तेदारों को दिया गया। हालाँकि, विरोध प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने अशांति को दबाने के लिए सरकार द्वारा कथित अत्यधिक बल के इस्तेमाल के लिए जवाबदेही की मांग की।

ताजा विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद सरकार ने हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन ऑपरेटरों के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें 4जी सेवाएं बंद करने का निर्देश मिला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और व्हाट्सएप ब्रॉडबैंड कनेक्शन के माध्यम से भी उपलब्ध नहीं हैं।

पीएम हसीना और उनकी पार्टी ने विपक्षी दलों और अब प्रतिबंधित दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी पार्टी और उनकी छात्र शाखाओं पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक के बाद हसीना ने आरोप लगाया, “जो लोग अभी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वे छात्र नहीं हैं, बल्कि आतंकवादी हैं जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं।” उन्होंने देशवासियों से इन आतंकवादियों को सख्ती से दबाने की अपील की।

अवामी लीग ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री ने हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा करने के लिए कहा है। पार्टी ने कहा, उन्होंने शीर्ष अधिकारियों और गृह मंत्री को निर्देश दिया कि जो छात्र निर्दोष हैं और जिनके खिलाफ हत्या और बर्बरता जैसे गंभीर अपराधों के कोई आरोप नहीं हैं, उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए। जेल में बंद प्रदर्शनकारियों की रिहाई आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक थी।

बांग्लादेश सेना ने एक बयान में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि वे लोगों के साथ खड़े हैं। सेना प्रमुख वेकर-उज़-ज़मान ने अधिकारियों से कहा कि “बांग्लादेश सेना लोगों के विश्वास का प्रतीक है” और “यह हमेशा लोगों के साथ खड़ी रही है और लोगों और राज्य के लिए ऐसा करना जारी रखेगी”।

इस बीच कुछ पूर्व सैन्य अधिकारी छात्र आंदोलन में शामिल हो गए हैं, और पूर्व सेना प्रमुख जनरल इकबाल करीम भुइयां ने समर्थन दिखाने के लिए अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल तस्वीर को लाल कर दिया है।

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