पूर्वी दिल्ली की एक सोसाइटी में दर्जन भर बिल्लियों की हुई संदिग्ध मौत, जहर देकर मारने का आरोप उठी जांच की मांग

देश की राजधानी दिल्ली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल बीते कुछ दिनों में पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज 1 इलाके में स्थित सहयोग अपार्टमेंट में करीब दर्जन भर बिल्लियों की मौत हो गई है। सोसाइटी में रह रहे लोगों के मुताबिक़ इन बिल्लियों की मौत ऐसे ही नहीं हुई है। इन लोगों का कहना है कि बिल्लियों को जान बूझकर मारा गया है। सोसाइटी के लोगों ने इस मामले को लेकर पांडव नगर थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। वहीं पुलिस ने भी केस दर्ज कर इस घटना की जांच शुरू कर दी है। बिल्लियों के मौत की वजह का पता लगाने के लिए पुलिस आस-पास के लोगों से पूछताछ कर रही है और सोसाइटी में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है।

सोसाइटी में रह रहे लोगों ने आशंका व्यक्त की है कि इन बिल्लियों को खाने के सामान में जहर मिलाकर खिला दिया गया जिससे इनकी मौत हो गई। सहयोग अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों ने बताया कि इस अपार्टमेंट के कैंपस में लगभग दर्जन भर बिल्लियां रहती थीं। अपार्टमेंट में रह रहे लोग ही उन बिल्लियों की देखभाल करते थे, लेकिन बीते 2-3 दिनों के अंतर्गत अचानक से करीब 10 बिल्लियों की मौत हो गई। ये बिल्लियां अपार्टमेंट में ही अलग-अलग जगहों पर मृत पाई गईं। हालांकि अभी भी सोसाइटी में 5 बिल्लियां जीवित हैं और इनमें से एक गर्भवती है।

सोसाइटी के लोगों ने बताया कि उन्हें लगता है कि इन बिल्लियों को किसी ने जान-बूझकर मारा है। स्थानीय लोगों को इस बात की भी आशंका है कि किसी सिरफिरे ने इस काम को अंजाम दिया हो और ये व्यक्ति इसी सोसाइटी में भी रहता हो।

जिन बिल्लियों की मौत हुई है उसमें एक समानता भी दिखती है और वो ये है कि मृत पाई गई सभी बिल्लियों का रंग काला है। वैसे इस सोसाइटी में रह रहे ज्यादातर बिल्लियों का रंग काला ही है।

सहयोग अपार्टमेंट दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स की सोसायटी है जिसमे ज्यादातर दिल्ली यूनिवर्सिटी के ही शिक्षक रहते हैं।

मालूम हो कि पशुओं के खिलाफ क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत, जानवरों को बार-बार मारने या जहर देने पर न केवल जुर्माना बल्कि धारा 428 के तहत कारावास का भी प्रावधान है। आईपीसी की अपराध भी हो सकती हैं, जिसके लिए दो साल तक की कैद की सजा है।

संविधान के अनुच्छेद 51 ए (जी) के अनुसार- वनों, झीलों, नदियों एवं वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण को महत्व देना, उसकी रक्षा करना एवं उसमें संवर्धन करना तथा प्राणी मात्र (जीवित प्राणियों) के प्रति दया भाव रखना हमारा कर्त्तव्य है।

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