मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक बार फिर गुरुवार को सुनवाई की और 4 दिनों तक लगातार सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने आज इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही केंद्र सरकार ने कोर्ट को चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल दी। सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी, अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल लेकर आए थे। इससे पहले बुधवार को पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने केंद्र सरकार से नियुक्ति से जुड़ी फाइल लेकर आने को कहा था। जस्टिस जोसेफ ने नाराजगी जताते हुए अटॉर्नी जनरल से पूछा कि 18 तारीख को हमने मामले की सुनवाई की, उसी दिन आप फाइल पेश करते हैं और उसी दिन पीएम कहते हैं कि मैं उनके नाम की सिफारिश करता हूं। यह जल्दबाजी क्यों की गई?
जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा कि, ‘निवेदन के अनुसार, यह वैकेंसी 15 मई को उपलब्ध हुई थी।क्या आप हमें बता सकते हैं कि 15 मई से 18 नवंबर तक आपने क्या किया? सरकार को ऐसा क्या हो गया कि यह नियुक्ति एक ही दिन में सुपरफास्ट तरीके से कर दी गई? सेम डे प्रोसेस, सेम डे क्लियरेंस, सेम डे अप्लिकेशन, सेम डे अपॉइंटमेंट, 24 घंटे भी फाइल नहीं चली है। बिजली की तेजी से नियुक्ति हुई’?
जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि, ‘हम वास्तव में नियुक्ति के ढांचे को लेकर चिंतित हैं। अपने सबमिशन पर आएं। इसमें कहा गया है कि रखी गई सूची के आधार पर आपने 4 नामों की सिफारिश की है। मैं यह समझना चाहता हूं कि नामों के विशाल भंडार में से आप वास्तव में किसी नाम का चयन कैसे करते हैं? मुझे बेबाक होने दें’. जस्टिस जोसेफ ने कहा कि हमारे पास किसी व्यक्ति के खिलाफ कुछ भी नहीं है। यह व्यक्ति वास्तव में एकैडमिक रूप से उत्कृष्ट है। लेकिन हम नियुक्ति की संरचना से चिंतित हैं। अपने सबमिशन पर आएं।
जस्टिस जोसेफ के सवाल के जवाब में एजी आर. वेंकटरमानी ने कहा कि ये सभी फैक्टर है, जिस पर विचार किया गया है। इस पर जस्टिस जोसेफ ने पूछा- बस एक दिन? एजी ने कहा कि इसी तरह सिस्टम काम कर रहा है। कन्वेंशन काम कर रहा है। हम यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकते कि यह एक मुआवज़ा है, क्योंकि यह एक निश्चित तरीके से हो रहा है। जस्टिस रस्तोगी ने कहा माफ कीजिएगा. हम ऐसा कुछ नहीं कह रहे हैं। कृपया कुछ भी अनुमान न लगाएं। हम प्रक्रिया पर हैं।
जस्टिस जोसेफ ने कहा, ‘हम जानना चाहते हैं कि आप नियुक्ति कैसे करते हैं? आपका नाम कैसे आता है? आप कैसे तय करते हैं? हम जानना चाहते हैं कि जब एक कार्यकारी किसी कार्य को करता है तो नाम कैसे सामने आता है? हम हैरान हैं। इसके जवाब में एजी ने कहा, ‘कृपया थोड़ा रुकिए मैं आपसे विस्तारपूर्वक मामले पर गौर करने की अपील करता हूं। क्या माई लॉर्ड्स अधिनियम की धारा 6 पढ़ सकते हैं.’ जस्टिस जोसेफ ने बीच में कहा, ‘आपने कहा कि जिस श्रेणी में हाल ही में वो नियुक्त हुए हैं, उस श्रेणी में कोई अन्य अधिकारी नहीं है। हालांकि एक ही कैडर से ही ऐसे कई नाम हैं। हम सूची पढ़ सकते हैं।
जस्टिस जोसेफ ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी से कहा कि, ‘यह सवाल हम अब आखिरी बार पूछेंगे और फिर उसके बाद हम यह सवाल पूछना बंद कर देंगे। आप इन 4 नामों को कैसे लाते हैं, क्या आधार है? एजी ने फिर वही जवाब दोहराया. इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा तो अंतत: आप कह रहे हैं कि केवल उन्हीं लोगों को नियुक्त करने की आवश्यकता है, जो नियुक्ति के कगार पर हैं, ताकि उन्हें पूरे 6 साल का पीरियड न मिले। क्या वह कानून है? आप धारा 6 का उल्लंघन कर रहे हैं, यह हम साफ-साफ कह रहे हैं।
जस्टिस रिषिकेश रॉय ने कहा, ‘देखिए हमने कल फाइल मांगी थी।आप लाए, बहुत अच्छा। अब आप इसे जायज ठहरा रहे हैं। हम अभी भी तर्क के साथ संघर्ष कर रहे हैं’ ‘हमें लॉजिक समझ नहीं आ रहा। आपने सेम कैटिगरी में कई नामों में इन 4 नामों को कैसे चुना? अगर आप उम्र के हिसाब से बात करें तो 40 नाम और हैं, 36 लोग कैसे छूट गए?’ आप एक ही श्रेणी के कई नामों में से इन 4 नामों पर कैसे आते हैं? हम बस यह जानना चाहते हैं।
जस्टिस रस्तोगी ने कहा, ‘देखिए आप जो कह रहे हैं हम उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। हम तंत्र पर हैं। हम अभी आपके द्वारा संदर्भित डेटाबेस पर गए हैं। हमने एक ही कैडर के बड़ी संख्या में अधिकारियों को देखा। आपने यह भी कहा कि आप कार्यकाल को देखकर भी नियुक्ति करते हैं, ताकि व्यक्ति को पूरे 6 साल का कार्यकाल मिले। अब डेटाबेस में युवा भी हैं। हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपने इस एज फैक्टर, इस बैच वगैरह से किसी को फिल्टर करने के लिए क्या मैकेनिज्म अपनाया? एजी ने कहा कि इसे देखने के दो तरीके हैं, पहला- ‘मुझे कोई चाहिए तो मैं उसे लेता हूं’ और दूसरा – ‘सहूलियत के मुताबिक़’।
गुरुवार की सुनवाई के दौरान कोर्ट में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच खूब ठनी-
– चयन की प्रक्रिया का जवाब देते हुए अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में कहा कि क्या कोई लेंस है? जिससे कार्यपालिका कहेगी कि यह व्यक्ति विनम्र है और फिर कोई कहेगा कि वह विनम्र नहीं है। आप कैसे न्याय करते हैं?
– जस्टिस जोसफ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि कृपया पहले हमें बताएं कि आप इस सूची को कैसे तय करते हैं। जस्टिस जोसेफ ने पूछा कि कोई है जो दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाला था। जिन 4 नामों की सिफारिश की गई थी, उनमें वह सबसे कम उम्र के हैं। कैसे चयन किया?
– जस्टिस बोस ने पूछा कि हम स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, अधिसूचना, नियुक्ति, आदि पाते हैं …आगे क्या? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह इत्तिफाक की बात है। वह पंजाब कैडर के व्यक्ति हैं। जस्टिस बोस ने पूछा अमूमन ऐसा नहीं होता है। जवाब में एजी ने कहा कि यह सामान्य है। वह वैसे भी रिटायर होने वाले थे। जस्टिस रस्तोगी ने पूछा कि आपका आधार क्या है?
– जस्टिस रस्तोगी ने कहा कि तो प्लीज हमें दिखाइए। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि आपको समझना चाहिए कि यह विरोधात्मक नहीं है। यह हमारी समझ के लिए है। हम समझते हैं कि एक प्रणाली है, जिसने अच्छा काम किया है। लेकिन हम जानना चाहते हैं कि आप इस डेटाबेस को कैसे बनाते हैं।
– एजी ने कहा कि इस डेटाबेस को कोई भी देख सकता है। यह सार्वजनिक होता है, वेबसाइट पर है। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि फिर कैसे 4 नाम शॉर्टलिस्ट किए गए? वही हम जानना चाहते हैं. कैसे कानून मंत्रालय ने इन नामों को फ़िल्टर किया? जवाब में एजी ने कहा कि निश्चित आधार हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सरकार से सवालों की लिस्ट ये रही-
1. यह जल्दबाजी क्यों की गई?
2. आप 4 नामों को कैसे लेकर आए?
3. कैसे इन नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया?
4. चयन प्रक्रिया क्या है?
5. कार्यकाल के बारे में स्पष्ट बताएं?
6. आपने उचित व्यक्ति को फिल्टर करने के लिए क्या मैकेनिज्म अपनाया?
7. आपने कैसे चयन किया?
8. बस एक दिन में सबकुछ क्यों?
9. सबसे जूनियर का चयन क्यों?
10. आपका आधार क्या है?
