प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना; रक्षा, टेक्नोलॉजी सेक्टर समेत कई समझौते होने की है उम्मीदें

प्रधानमंत्री मोदी अपने 9 वर्षों के कार्यकाल में पहली बार अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं। अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में अमेरिका की आखिरी राजकीय यात्रा नवंबर 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री के इस दौरे को ऐतिहासिक बताया जा रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 बार अमेरिका के दौरे पर जा चुके हैं। पहली बार प्रधानमंत्री मोदी 2014 में अमेरिका दौरे पर गए थे। लेकिन पीएम का यह दौरा खास है। यह इसलिए क्योंकि वह एकमात्र ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को अपने टर्म में दूसरी बार संबोधित करेंगे। अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के साथ कई द्वपक्षीय और सामरिक करार करने वाले हैं।

प्रधानमंत्री मोदी 21-23 जून अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की शुरुआत 21 जून सुबह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में योगा दिवस समारोह से होगी। न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री कुछ बड़े नेताओं से मुलाकात भी करेंगे। 21 जून को वाशिंगटन डीसी में ‘स्केलिंग फॉर फ्यूचर’ पर आधारित एक कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। 21 जून को ही अमेरिका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक निजी मुलाकात होने की संभावना है। पीएम मोदी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन के साथ रात्रिभोज करेंगे।

22 जून को व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधित्व स्तर की द्विपक्षीय बैठक होंगी। प्रधानमंत्री मोदी यूएस कांग्रेस को संबोधित भी करेंगे। 23 जून को प्रधानमंत्री मोदी कुछ कंपनियों के CEOs से मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी कैनेडी सेंटर में एक कार्यक्रम में प्रमुख पेशेवर लोगों से मुलाकात करेंगे। कैनेडी सेंटर के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री कम्युनिटी लीडर्स से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा पीएम प्रवासी भारतीयों के सदस्यों से भी मिलेंगे।

अमेरिका रवाना होने से पहले PM मोदी ने ट्वीट कर कहा- भारत-अमेरिका के बीच गहरे संबंध हैं और हर क्षेत्र में हमारी भागीदारी लगातार बढ़ी है। अमेरिका गुड्स एंड सर्विसेज में हमारा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। इसके अलावा, साइंस, टेक्नोलॉजी, हेल्थ और डिफेंस के क्षेत्र में भी हम सहयोगी हैं। दोनों देश इंडो-पैसेफिक को फ्री और ओपन बनाने की तरफ भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

पीएम ने कहा कि राष्ट्रपति बाइडेन और दूसरे US लीडर्स के साथ मेरी बातचीत दोनों देशों के बीच बाइलेट्रल रिलेशन को और आगे लेकर जाएगी। मुझे विश्वास है कि अमेरिका की मेरी यात्रा डेमोक्रेसी, डायवर्सिटी और आजादी के मूल्यों पर आधारित हमारे संबंधों को और मजबूत करेगी। हम वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक साथ मजबूती से खड़े हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे से पहले उनके भव्य स्वागत की तैयारी वहां रह रहे भारतीय-अमेरिकी समुदाय द्वारा की जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान 350 फाइटर जेट इंजनों के भारत में निर्माण का बड़ा रणनीतिक सौदा हो सकता है। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जनरल इलेक्ट्रिक को भारत में फाइटर जेट इंजन (GE 414) बनाने का परमिट देने के समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके अलावा 30 MQ-9 B आर्म्ड ड्रोन खरीदने का समझौता भी पीएम की इस यात्रा में हो सकता है। पीएम मोदी की इस यात्रा का एक पहलू टेक सेक्टर का है। बाइडेन और मोदी ने साल 2022 में टेक्नॉलजी के मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया था। दोनों नेताओं ने iCET यानी इनीशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नॉलजी को लॉन्च किया था। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वॉन्टम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड वायरलेस कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग टेक्नॉलजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

पीएम मोदी लगातार अमेरिका के साथ सबंधो को मजबूत करने में लगे हैं। एक तरफ भारत रूस के साथ अपनी दोस्ती निभा रहा है तो वहीं दूसरी ओर यूक्रेन को मानवीय मदद भी पहुंचा रहा है। इस परिस्थिति में भी भारत-अमेरिका के साथ द्विपक्षीय और सामरिक रूस सबंध को नया आयाम दे रहा है। यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के पश्चिमी देशों के साथ तनातनी के बावजूद भारत अमेरिका के साथ संबंध को नयी ऊंचाई दे रहा है। जाहिर है भारत और अमेरिका का हित एक रहा है।

प्रधानमंत्री के अमेरिकी दौरे से अमेरिका-भारत संबंधों में नई कहानी लिखी जा सकती है। भारत और अमेरिका फिलहाल तकनीकी हस्तानांतरण के साथ साथ रक्षा-मामलों में गरमाहट लाने पर विचार कर रहा है। भारत अपना रक्षा उत्पादन बढ़ाना चाहता है और इसके लिये भारत को अमेरिका से चिप्स की दरकार है। उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे के दौरान अमेरिकी कम्पनियों के साथ कोई करार हो सकता है। गौरतलब है कि जनवरी में ही दोनों देशों के बीच आईसेट (इनीशिएटिव ऑन काउंसिल ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज) पर हस्ताक्षर हुआ। इसमें भारत-अमेरिका एक साथ कैसे काम करेंगे, इसकी रूपरेखा तय हुई। पिछले हफ्ते जब अमेरिकी रक्षामंत्री ऑस्टिन लॉयर भारत आए तो एक डिफेंस समझौते पर भी बात हुई। उम्मीद कर रहे हैं कि पीएम मोदी के दौरे के दौरान इन दोनों चीजों पर बात होगी और ठोस समझौता भी होगा।

वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम लेडी के निमंत्रण पर हो रहा है। लेकिन अमेरिका में प्रधानमंत्री के दौरे से पहले जिस तरह की भव्य तैयारियां की जा रही है, उससे साफ है कि फिलहाल अमेरिका भारत को अन्य देशों के मुकाबले कितना तवज्जो देता है। ऐसी स्थिति में भारत- अमेरिका सबंध विश्व बिरादरी में एक नई इबारत लिख सकता हैं। इसका प्रभाव पूरे विश्व में शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन कई बार अपना लगाव दिखा चुके हैं। ऐसी स्थिति में एक बार फिर जब प्रधानमंत्री मोदी और बाइडन अमेरिका में गले मिलेंगे तो निश्चित रूप से यह सबंध भारत और अमेरिका के संबंधों को नई ऊंचाइयां देगा।

अमेरिका का दौरा ख़त्म करने के बाद 24-25 जून को प्रधानमंत्री मोदी इजिप्ट की यात्रा पर रहेंगे। ये प्रधानमंत्री मोदी की पहली इजिप्ट यात्रा होगी। यह 1997 के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *