भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 2,000 रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा के बाद विपक्ष ने केंद्र और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद जयराम रमेश ने कहा: “तथाकथित स्वयंभू विश्वगुरु। फर्स्ट एक्ट, सेकंड थिंक (फास्ट)। 8 नवंबर 2016 के विनाशकारी तुगलकी फरमान के बाद इतनी धूमधाम से पेश किए गए 2,000 रुपये के नोट अब वापस लिए जा रहे हैं।”
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि, “केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि 2000 रुपये के नोट के चलन को रोकने के पीछे क्या मंशा है।”
आम आदमी पार्टी की नेता अलका लांबा ने कहा: ‘अगर जांच की जाए तो नोटबंदी सदी का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा। 1000 रुपये के नोट बंद कर और 2000 रुपये के नोट जारी कर काले धन पर हमला करने के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भगोड़े पूंजीपति मित्रों का काम ही आसान कर दिया। नोटबंदी से पहले देश का पैसा लेकर भागते तो मित्रों (भाइयों) को दोगुने बोरों में पैसा भर भागना पड़ता, परेशानी होती, नोट बंदी के बाद और 2000 रुपये का नोट जारी करने से मित्रों का काम हुआ आसान उससे आधे में ही काम हो गया। अब ना भगोड़े मित्र आए आयेंगे, ना ही कालाधन वापस आयेगा और अब तो 2000 रुपया का नोट भी बाजार से गायब होने जा रहा है। ‘
लांबा के पार्टी सहयोगी सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘पीएम ने नोटबंदी का चलन शुरू किया था, नए नोट शुरू किए। जब उन्होंने ऐसा किया तो लोगों की जान चली गई और व्यवसाय चौपट हो गए। इसने भ्रष्टाचार और आतंकवाद को समाप्त करने में मदद नहीं की। मुझे उम्मीद है कि यह विशेषज्ञों की सिफारिश पर लिया गया फैसला है, न कि बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला।”
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘पहले उन्होंने कहा कि 2000 रुपये के नोट से भ्रष्टाचार रुकेगा। अब वे कह रहे हैं कि इन पर प्रतिबंध लगाने से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। इसलिए हम कहते हैं कि एक प्रधानमंत्री को शिक्षित होना चाहिए। एक अनपढ़ पीएम को कोई कुछ भी कह सकता है। वह नहीं समझेंगे और जनता को भुगतना पड़ेगा।”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पूछा कि, ‘नोटों को वापस लेना ही था तो इन्हें बाजार में क्यों उतारा गया?
ममता बनर्जी ने इसे भारतीयों के साथ धोखा बताया और कहा- ‘यह 2000 रुपये का धमाका नहीं था बल्कि एक अरब भारतीयों के साथ बिलियन डॉलर का धोखा था। जागो मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, नोटबंदी से हमें जो तकलीफ हुई है, उसे भुलाया नहीं जा सकता और जिसने यह तकलीफ दी, उसे माफ नहीं किया जाना चाहिए।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने RBI द्वारा 2,000 रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने पर कहा, ‘उम्मीद के मुताबिक, सरकार/आरबीआई ने 2000 रुपए के नोट वापस ले लिए हैं और नोटों को बदलने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया है।’
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, पीएम मोदी की एक और नोटबंदी। दुख की बात है कि भाजपा सरकार के पास अपनी नीतियों के बारे में स्पष्टता नहीं है।
मालूम हो कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रचलन से 2,000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोट वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि, नोट वैध मुद्रा के रूप में जारी रहेंगे। आरबीआई ने बैंकों को सलाह दी है कि वे तत्काल प्रभाव से 2,000 रुपए के नोट जारी करना बंद करें। 23 मई 2023 से किसी भी बैंक में एक समय में 2000 रुपये के नोट को अन्य मूल्यवर्ग के नोटों से बदले जा सकते हैं। 30 सितंबर 2023 तक 2000 रुपये के नोटों को बैंक में जमा कराया जा सकता है।
