श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने कहा कि 22 जनवरी को मंदिर के भव्य अभिषेक के लिए निमंत्रण केवल उन लोगों को दिया गया है जो “भगवान राम के भक्त” हैं। उनकी टिप्पणी हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के उस बयान की प्रतिक्रिया में थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें उद्घाटन के लिए निमंत्रण नहीं मिला है।
मुख्य पुजारी ने बताया, “निमंत्रण केवल उन लोगों को दिया जाता है जो भगवान राम के भक्त हैं। यह कहना पूरी तरह से गलत है कि भाजपा भगवान राम के नाम पर लड़ रही है, हमारे प्रधानमंत्री का हर जगह सम्मान किया जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत काम किया है। यह यह राजनीति नहीं है। यह उनकी भक्ति है।”
बीते दिनों निमंत्रण में कथित चूक को लेकर उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि प्रतिष्ठा समारोह का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उद्घाटन समारोह को राजनीतिक कार्यक्रम में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए या किसी एक पार्टी के इर्द-गिर्द नहीं घूमना चाहिए। हालांकि, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि वह राम मंदिर के उद्घाटन से बहुत खुश हैं और उन्होंने इस मुद्दे के लिए अपने पिता बाल ठाकरे की लड़ाई को याद किया।
आचार्य सत्येन्द्र दास ने भगवान राम पर की गई टिप्पणी को लेकर उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना (यूबीटी) के सहयोगी संजय राउत पर भी निशाना साधा।
उन्होनें कहा, संजय राउत को इतना दर्द है कि वह बता नहीं सकते कि ये वही लोग हैं जो भगवान राम के नाम पर चुनाव लड़ते थे। जो लोग भगवान राम को मानते थे वे सत्ता में हैं। वह किस बकवास की बात कर रहे हैं? वह भगवान राम का अपमान कर रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शनिवार (दिसंबर 30, 2023) को 22 जनवरी के कार्यक्रम का कथित रूप से राजनीतिकरण करने के लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी जल्द ही चुनावों के लिए “भगवान राम को अपना उम्मीदवार घोषित करेगी”।
उन्होंने राम मंदिर के उद्घाटन के निमंत्रण पर सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। राउत ने कहा, “भगवान राम के नाम पर इतनी राजनीति हो रही है।”
कई विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर उद्घाटन के कथित राजनीतिकरण को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किया है।
सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने मंदिर प्रतिष्ठा के निमंत्रण को यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि “धर्म एक व्यक्तिगत पसंद है और इसे राजनीतिक लाभ के साधन में परिवर्तित नहीं किया जाना चाहिए”।
23 दिसंबर को राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा ने येचुरी से मुलाकात की और उन्हें अयोध्या में उद्घाटन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। हालाँकि, एक दिन बाद, सीपीआई (एम) प्रमुख ने निमंत्रण अस्वीकार कर दिया। उनकी पार्टी ने बाद में एक बयान जारी कर इसका कारण बताया।
मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी उद्घाटन में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। उनकी पार्टी द्वारा 22 जनवरी को अभिषेक के लिए किसी प्रतिनिधि को भेजने की भी संभावना नहीं है। हालाँकि पार्टी ने अभी तक निर्णय पर कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि टीएमसी राम मंदिर उद्घाटन को 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के लिए एक विजयी उपकरण के रूप में उपयोग करने के भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए तैयार नहीं है।
मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक 16 जनवरी से शुरू होकर सात दिनों तक चलेगा। अंतिम दिन, 22 जनवरी को सुबह की पूजा के बाद, दोपहर में मृगशिरा नक्षत्र में राम लला के विग्रह का अभिषेक किया जाएगा।
