महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी इन दिनों प्रशासनिक लचर व्यवस्था के कारण छात्र छात्राओं के साथ ही शिक्षकों का भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय के लचर व्यवस्था के कारण छात्र छात्राओं को अभी तक अंक पत्र (मार्कशीट) उपलब्ध नहीं हो पाया है, जिसके कारण अन्य किसी विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाएंगे। अंकपत्र में गड़बड़ियां को लेकर छात्र नेताओं का विश्वविद्यालय में आए दिन धरना प्रदर्शन चल रहा है, जिसके कारण विश्वविद्यालय का कार्य भी बाधित हो रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ शिक्षक विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों को चिन्हित कर परीक्षा कार्यों से वंचित कर देना चाहिए। विश्वविद्यालय के इतिहास को उठाकर देखा जाए तो पूर्व कुलपतियों ने समय-समय पर परीक्षा में गड़बड़ियां करने वाले शिक्षकों को 3 वर्ष तक परीक्षा से वंचित कर चुके हैं।
लेकिन वर्तमान कुलपति ऐसे गंभीर मुद्दों पर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की लचर व्यवस्था यहीं नहीं समाप्त हो रही है। ऐसे कई मुद्दे हैं जो लंबित है। विश्वविद्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय में किताबों की कमी है,जिसके कारण छात्र/ छात्राओं को पुस्तक खरीद कर पढ़नी पड़ती है। दिखाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने करोड़ों रुपए की टेस्ट बुक/ इंटरनेट बुक खरीदारी कर पूर्व कुलपति (त्रिलोकीनाथ सिंह ) ने जेब भरने का कार्य किया।
लेकिन विषय से संबंधित किताब नदारत है। विश्वविद्यालय के विभागों में शिक्षकों की कमी कोई नई बात नहीं है। विश्वविद्यालय को पढ़ाने से ज्यादा सत्र नियमित कर परीक्षा लेकर दिखाने पर जोर ज्यादा रहता है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी क्यों ना हो लगभग दो दर्जन संविदा शिक्षक कोर्ट से जीत कर आने के बाद भी विश्वविद्यालय ने अभी तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया है। विश्वविद्यालय में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, कि एक दागी प्रोफेसर के विरोधाभास हरकत के कारण स्नातक पाठ्यक्रम में ऐच्छिक विषय पढ़ाने वाले राष्ट्र गौरव विषय को वेबसाइट पर चढ़ाने के 3 दिन बाद दबाव में लचर व्यवस्था के कारण वेबसाइट से हटा दिया है।
सूत्रों ने बताया कि इतिहास विभागाध्यक्ष के दबाव में विश्वविद्यालय ने वेबसाइट से राष्ट्र गौरव विषय को हटा दिया।जिसके कारण विश्वविद्यालय में राष्ट्र गौरव बढ़ाने वाले संविदा शिक्षकों की नियुक्ति अटक गई है। साथ ही स्थानीय महादेव महाविद्यालय से संबंधित फर्ज़ीवाड़े पर नजर जाने के बाद भी कारवाई के नाम पर नील बटे सन्नाटा हैं। इस पर जल्द पूरी खबर लेकर तक्षकपोस्ट आ रहा है।
