ममता बनर्जी ने संदेशखाली में अशांति के लिए आरएसएस को ठहराया जिम्मेदार, बोली- ‘तृणमूल नेता बीजेपी के निशाने पर’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संदेशखाली में अशांति के लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि भाजपा का निशाना एक तृणमूल नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार मामले में आरोपी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा, “हम संदेशखाली स्थिति पर गौर कर रहे हैं, किसी भी गलत काम में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, भाजपा का निशाना तृणमूल कांग्रेस के नेता (शाहजहां शेख) थे।”

उन्होंने कहा, ”मैंने कभी किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया है और न ही होने दूंगी।”

बनर्जी ने कहा, “मैंने कभी भी अन्याय का समर्थन नहीं किया। मैंने राज्य आयोग और प्रशासन को वहां भेजा। अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है… हमारी महिला टीम वहां मौजूद है। महिला पुलिस टीम लोगों से मुलाकात कर रही है। उनकी शिकायतों को सुनने के लिए उनके दरवाजे। हम निश्चित रूप से उन मुद्दों का समाधान करेंगे जो रिपोर्ट किए जाएंगे। इस पर कार्रवाई करने के लिए मुझे मामले को जानना होगा। वहां आरएसएस का आधार है। 7-8 साल पहले वहां दंगे हुए थे। यह संवेदनशील दंगा स्थलों में से एक है। हमने सरस्वती पूजा के दौरान स्थिति को मजबूती से संभाला अन्यथा अन्य योजनाएँ भी थीं।”

ममता के बयान पर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, “उनका ऐसा कहना शर्मनाक है। उन्होंने संदेशखाली पीड़ितों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है और उन्हें मीडिया के सामने अपना चेहरा दिखाने की चुनौती दी है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आपने ऐसा क्यों किया है? आप इतनी क्रूर और इतनी महिला विरोधी क्यों हो गई हो? ये महिलाएं खुद राज्यपाल के सामने, दुनिया के सामने अपनी आपबीती सुना रही हैं। वह कहती हैं, ‘संदेशकली आरएसएस का बर्नर है’। अगर ये शब्द किसी बीजेपी नेता के मुंह से निकले होते तो देश में तूफान आ जाता- चाहे वो राहुल गांधी हों, चाहे वामपंथी हों, सीपीएम हो, सीपीआई हो या मानवाधिकार संगठन हों। अब ये सभी शांत हैं। इसे शर्मनाक और दोहरा मापदंड कहा जाता है।”

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी ने कहा, “संदेशखाली को देखकर नंदीग्राम की याद आती है, जो ग़लतियां वामफ्रंट ने की वहीं ग़लतियां तृणमूल कर रही है। इतिहास दोहरा रहा है। जो जनता तृणमूल को डर के कारण समर्थन कर रही उनका डर खत्म हो गया है। यही कारण था कि मैंने तृणमूल को छोड़ा। यह हर एक जिले की घटना है। ममता बनर्जी को खुद संदेशखाली जाना चाहिए।”

ममता बनर्जी का यह बयान संदेशखाली पर मुख्यमंत्री से बयान की मांग को लेकर भाजपा विधायकों द्वारा विधानसभा से वाकआउट करने के कुछ घंटों बाद आया। उस समय बनर्जी सदन में मौजूद नहीं थीं।

वॉकआउट के बाद मीडिया से बात करते हुए भाजपा के चीफ व्हिप मनोज तिग्गा ने कहा ‘सीएम मुद्दे पर कोई बयान नहीं दे रही हैं। ऐसे में हमने सदन से वॉकआउट का फैसला किया। संदेशखाली में कानून व्यवस्था चरमराई हुई है और हमें वहां जाने नहीं दिया जा रहा है। टीएमसी के चीफ व्हिप निर्मल घोष ने भाजपा के विरोध पर कहा कि भाजपा राज्य के माहौल को गरमाना चाहती है और सदन की कार्यवाही को बाधित कर रही है।

इस बीच, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बनर्जी की टिप्पणी से साबित होता है कि आरएसएस सही रास्ते पर है। अधिकारी ने संदेशखाली में यौन शोषण की रिपोर्ट की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने का भी आह्वान किया।

अधिकारी ने कहा, ‘हमारा मिशन संदेशखाली पहुंचना और गिरफ्तार हुए लोगों के परिजनों से मिलना है। हम उनके व्यवहार के अनुसार जवाब देंगे, लेकिन हम कानून का पालन करने वाले लोग है।’

अधिकारी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पुलिस अधिकारी अमीन-उल-हक ने मुझे अपने बूट से मारा। उन्होंने ऐसा एक विपक्ष के नेता के साथ किया। मैं कुछ देर विरोध करूंगा और अगर वे अपने निर्णय पर फिर से विचार नहीं करते हैं तो मैं हाई कोर्ट में जाऊंगा। एक मामूली डीएसपी ने चार बार के विपक्ष के नेता को मारा। यह किस तरह का व्यवहार है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘धारा 144 का उल्लंघन केवल शुभेंदु अधिकारी के मामले में हुआ, क्योंकि उसने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। क्योंकि वह भाजपा और विपक्ष का नेता है। कल हम कलकत्ता हाई कोर्ट में जाएंगे। कोई मुझे नहीं रोक सकता। मैं अदालत जाऊंगा और पूरे कानूनी अधिकार के साथ वापस आऊंगा।’

इस बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य अंजू बाला पीड़ितों से मिलने संदेशखाली पहुंचे। हलदर ने कहा, ”मुझे संदेशखाली के बारे में रिपोर्ट मिली है। बहुत से लोग बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया। आयोग के सदस्य और मैं यहां सुनने आए हैं उन्हें। मैं उनकी बात सुनूंगा और सरकार को रिपोर्ट दूंगा। यह एक संवैधानिक संस्था है, कोई राजनीतिक संस्था नहीं।”

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य अंजू बाला ने कहा, ”यह शर्मनाक घटना है कि आज के समय में भी महिलाओं के साथ ऐसा कुछ हो सकता है। राज्य की सीएम एक महिला हैं। ‘नाम ममता रखती है लेकिन दिल में ममता नाम’ ‘की चीज नहीं है’।”

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी इस मामले में गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है। इसमें उन्होंने पुलिस पर संदेशखाली में ‘उपद्रवी तत्वों’ के साथ मिलने होने का आरोप लगाया है।

इससे पहले संदेशखाली मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन को लेकर सोमवार को विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी समेत छह बीजेपी विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया था। गुरुवार को लगातार आठवें दिन संदेशखाली में विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर आईं और शाजहान शेख और उनके अनुयायियों की गिरफ्तारी की मांग की।

शाहजहां और उसके सहयोगियों के खिलाफ आरोपों में जबरन जमीन पर कब्जा करना और महिलाओं का यौन उत्पीड़न करना शामिल है। शेख 5 जनवरी से फरार है जब एक कथित राशन घोटाले के सिलसिले में उसके आवास पर छापेमारी के दौरान भीड़ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमला कर दिया था।

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