कानपुर देहात मामला: सीएम योगी ने मजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेश, विपक्ष ने मौतों के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार

कानपुर देहात मामला: कानपुर देहात की घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर मंडल के आयुक्त और अतिरिक्त महानिदेशक, कानपुर जोन के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया, ताकि मां और बेटी की मौत की जांच की जा सके। राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की राहत देने की भी घोषणा की है।

एक अधिकारी ने कहा- “घायल बेटों के उचित इलाज के लिए सरकार द्वारा परिवार को 5-5 लाख रुपये (कुल 10 लाख रुपये) की सहायता प्रदान की गई है।” सरकार की ओर से परिवार को सुरक्षा भी मुहैया कराई गई है।

इस बीच कानपुर देहात की मैथा तहसील के मडौली गांव में सोमवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान लगी आग में गंभीर रूप से झुलसी मां-बेटी का अंतिम संस्कार कड़ी सुरक्षा के बीच बिठूर के वाल्मीकि घाट पर किया गया। दाह संस्कार के दौरान पुलिस अधीक्षक (एसपी) बीबीजीटीएस मूर्ति, संभागीय आयुक्त राज शेखर और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

इस घटना से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा कि ‘भाजपा सरकार के बुल्डोजर पर अमानवीयता का तमाशा मानवता और संवेदनशीलता के लिए खतरा बन गया है।’

इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दौरान उनकी राज्य विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने की योजना है। सदन में सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडे और विधायक अमिताभ वाजपेयी ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार प्रत्येक मौत के लिए पीड़ित परिवार को 5 करोड़ रुपये का मुआवजा और अपने दो सदस्यों को सरकारी नौकरी दे।

बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट कर कहा कि कानपुर देहात की घटना की चर्चा यूपी सरकार के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से ज्यादा हो रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार की बुलडोजर चलाने की नीति लोगों को डराने और उन्हें बेबस करने के लिए है। यूपी जैसे बड़े राज्य में, जो गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और पिछड़ेपन से बुरी तरह प्रभावित है, सरकार की बुलडोजर नीति गरीबों और मासूमों तक की मौत का कारण बन रही है।’ यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है”।

उधर, इस मामले के आरोपी रूरा थाना प्रभारी दिनेश गौतम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है”।

प्रधान सचिव (गृह) संजय प्रसाद ने कहा कि कानपुर मंडल आयुक्त राज शेखर को एडीजी कानपुर आलोक सिंह के परामर्श से एसआईटी के अन्य सदस्यों का चयन करने और निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

बता दें कि कानपुर देहात में हुई इस घटना को लेकर कानपुर देहात से लेकर लखनऊ तक के अधिकारी हरकत में हैं। इसी क्रम में विकास व राजस्व विभाग की टीमें जल्द ही घटनास्थल का मुआयना करेंगी। ये टीमें वहां आवास, वृद्धावस्था पेंशन और कृषि भूमि के पट्टे संबंधी कार्यवाही पूरी करेंगी।

गौरतलब है कि प्रमिला दीक्षित (44) और उनकी बेटी नेहा दीक्षित (21) की सोमवार दोपहर अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान मौत हो गई थी। प्रमिला दीक्षित के पुत्र शिवम दीक्षित ने दाह संस्कार के बाद मीडियाकर्मियों को बताया कि अधिकारियों ने अनुग्रह राशि के रूप में 1 करोड़ रुपये, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सरकारी योजना के तहत एक घर, उसके और उसके भाई के लिए जमीन देने पर सहमति व्यक्त की है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से इसकी तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई है।

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