संविधान पर अरुण गोविल की टिप्पणी से विवाद, विपक्ष ने बीजेपी पर साधा निशाना

मेरठ से बीजेपी के लोकसभा उम्मीदवार अरुण गोविल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो क्लिप में अभिनेता से नेता बने अभिनेता को देश के संविधान में संभावित “परिवर्तन” पर चर्चा करते हुए सुना जा सकता है। गोविल की टिप्पणी की समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह सहित विपक्ष ने तीखी आलोचना की है।

वायरल हो रहे क्लिप में अरुण गोविल को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि समय के साथ संविधान में बदलाव हुए हैं और इसमें कोई नुकसान नहीं है। मेरठ से भाजपा उम्मीदवार उन आरोपों का जवाब दे रहे थे कि अगर भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्ता में लौटी तो संविधान बदल देगी।

उन्होनें कहा, “संविधान में समय के साथ परिवर्तन हुए हैं। परिवर्तन विकास का प्रतीक है। यह कोई बुरी बात नहीं है। उस समय परिस्थितियाँ अलग थीं; वर्तमान स्थिति अलग है। इसलिए यदि परिवर्तन करना है तो संविधान किसी एक व्यक्ति की मंशा से नहीं बदलता, इसे हर किसी की सहमति से बदला जा सकता है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार कुछ बड़ा करने का इरादा रखती है, क्योंकि उसका लोकसभा चुनाव में 400 सीटों का लक्ष्य है, गोविल ने कहा, “मुझे लगता है कि कार्ड पर कुछ है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लापरवाही से कुछ नहीं कहते हैं, हमेशा इसके पीछे एक अर्थ होता है।”

गोविल की टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित विपक्षी नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने कहा कि संविधान को पलटकर, भाजपा सारा लाभ अपने खेमे के कुछ चुनिंदा अरबपतियों को देना चाहती है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “जो लोग संविधान में प्रगतिशील संशोधन करने और मूलभूत बदलाव करने के बीच का अंतर नहीं समझते उन्हें टिकट देकर भाजपा ने भारी भूल की है, लेकिन फिर भी इससे ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि जनता ने हर भाजपा प्रत्याशी को हराने का फ़ैसला पहले ही कर लिया है।”

उन्होनें आगे कहा, “दरअसल भाजपा संविधान को पलटकर ग़रीबों, वचितों, शोषितों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के हक़-अधिकार व आरक्षण मारकर और पूंजीपतियों के हक़ में नीति-योजना बनाकर, सारा फ़ायदा-मुनाफ़ा अपने खेमे के कुछ गिने-चुने खरबपतियों को दे देना चाहती है। जो चुनावी-चंदे के नाम पर अपने बेशुमार फ़ायदे का हिस्सा भाजपाइयों को दे देते हैं। सही मायनों में ये जनता से वसूली का तरीक़ा है क्योंकि कोई भी पूंजीपति अपनी जेब से नहीं देता है, वो तो जनता से ही वसूलकर भाजपाइयों के दल और उनका व्यक्तिगत ख़ज़ाना भरता है। इसीलिए अपने वर्तमान और भविष्य को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश और देश की जनता, इस बार बहकावे में नहीं आनेवाली और भाजपा को हराकर और हटाकर ही दम लेगी। भाजपा हराओ, संविधान बचाओ!”

यहां तक ​​कि आम आदमी पार्टी (आप) नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी गोविल के बयान पर बीजेपी की आलोचना की। उन्होनें कहा, “देश के 85 फीसदी दलित, पिछड़े, वंचित और शोषित लोग सावधान हो जाएं। अब साफ हो गया है कि बीजेपी संविधान को खत्म कर देगी। आरक्षण खत्म हो जाएगा। लल्लू सिंह, ज्योति मिर्धा, अनंत हेगड़े के बाद अब अरुण गोविल ने भी ये बात कह दी है। अरुण गोविल सीधे तौर पर मोदी जी के उम्मीदवार हैं।”

दरअसल अरुण गोविल की टिप्पणी पीएम मोदी द्वारा खुद यह कहे जाने के कुछ दिनों बाद आई है कि उनकी सरकार संविधान का सम्मान करती है और यहां तक ​​कि बाबासाहेब अंबेडकर भी अब इसे खत्म नहीं कर पाएंगे।

प्रधानमंत्री ने राजस्थान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ”(बीजेपी) सरकार के लिए देश का संविधान ही सब कुछ है और अगर बाबा साहब अंबेडकर खुद भी आ जाएं तो भी वह संविधान को खत्म नहीं कर सकते।”

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