कठुआ हमले से पहले आतंकवादियों ने बंदूक की नोक पर स्थानीय लोगों को खाना पकाने के लिए मजबूर किया: सूत्र

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सेना के काफिले पर हमला करने वाले आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला करने से पहले कई ग्रामीणों को बंदूक की नोक पर उनके लिए खाना बनाने के लिए मजबूर किया था। सूत्रों ने बताया कि हमले के दौरान आतंकवादियों ने बॉडी कैमरे पहने थे और सेना के जवानों के हथियार छीनना चाहते थे। हालांकि सेना के जवानों ने घायल होने के बावजूद अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय देते हुए उनकी योजना को विफल कर दिया।

सोमवार को कठुआ जिले के बदनोटा गांव के पास उबड़-खाबड़ माचेडी-किंडली-मल्हार पहाड़ी मार्ग पर एक गश्ती दल पर आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में एक जूनियर कमीशंड अधिकारी सहित पांच सैन्यकर्मी मारे गए और कई घायल हो गए थे।

एक महीने के भीतर जम्मू क्षेत्र में यह पांचवां आतंकी हमला था।

सूत्रों के मुताबिक, आतंकवादी उन इलाकों में हमला कर रहे थे जो सुरक्षा संरचनाओं से बहुत दूर हैं और सड़क संपर्क खराब है, इसलिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त बल भेजने में समय लगा।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने पूछताछ के लिए 20 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है और सुरक्षा एजेंसियों ने हमले की जांच तेज कर दी है।

आतंकी हमले के बाद से बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। कठुआ के कंडी क्षेत्र और उसके साथ लगते अन्य जिलों के पहाड़ी और जंगली क्षेत्र के इलाके खंगाले जा रहे हैं। ड्रोन, हेलिकॉप्टर, खोजी कुत्तों की मदद भी ली जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि डोडा जिले के ऊंचे इलाकों में एक और तलाशी अभियान चल रहा है, जहां कठुआ में घात लगाकर किए गए हमले के एक दिन बाद मंगलवार शाम को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

कठुआ में घात लगाकर किए गए हमले से जुड़े तलाशी अभियान के बारे में अधिकारियों ने बताया कि उधमपुर, सांबा, राजोरी और पुंछ जिलों के विभिन्न हिस्सों में घने जंगलों में सेना और पुलिस के जवान भी तैनात हैं। सांबा के लाला चक इलाके, राजोरी के मंजाकोट इलाके और पुंछ के सुरनकोट में भी नए सिरे से तलाशी अभियान शुरू किया गया है।

ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सेना के जवानों की पहचान जेसीओ अनंत सिंह, हेड कांस्टेबल कमल रावत, सिपाही अनुज नेगी, राइफलमैन आदर्श नेगी और एनके कुमार के रूप में हुई है।

इससे पहले, सूत्रों ने कहा था कि कठुआ हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था, जिन्होंने हताहतों की संख्या को ज्यादा से ज्यादा करने के लिए अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों ने संभवत: स्थानीय समर्थकों की मदद से इलाके की टोह ली, जिससे योजनाबद्ध लक्षित हमले का संकेत मिला।

सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों ने अन्य गोला-बारूद के अलावा एम4 कार्बाइन राइफल और विस्फोटक उपकरणों सहित उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया।

हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के जवानों की मौत पर शोक व्यक्त किया और जोर देकर कहा कि सैनिक क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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