तमिलनाडु में लंबित विधेयकों की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘3 साल तक क्या कर रहे थे राज्यपाल?’

तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ अपनी कड़ी टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जनवरी 2020 से उनके समक्ष लंबित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी पर उन्हें फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की निष्क्रियता चिंता का विषय है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिपण्णी तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा 10 बिल लौटाए जाने के कुछ दिनों बाद आई है। पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने एक विशेष विधानसभा सत्र बुलाया था और लंबित बिलों को फिर से पास किया था। अदालत ने इस मामले को 1 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने इस तथ्य पर नाराजगी व्यक्त की कि राज्यपाल ने पंजाब सरकार के मामले में 10 नवंबर के आदेश के बाद ही लंबित विधेयकों पर कार्रवाई की।

कोर्ट ने कहा, “हमारी चिंता यह है कि हमारा आदेश 10 नवंबर को पारित किया गया था। ये बिल जनवरी 2020 से लंबित हैं। इसका मतलब है कि राज्यपाल ने अदालत के नोटिस जारी करने के बाद निर्णय लिया। राज्यपाल तीन साल तक क्या कर रहे थे? वह पार्टियों के सुप्रीम कोर्ट जाने का इंतज़ार कर रहे थे?”

तमिलनाडु सरकार द्वारा पीठ को सूचित करने के बाद कि विधानसभा ने शनिवार को आयोजित एक विशेष सत्र में 10 विधेयकों को फिर से अपना लिया है। राज्यपाल के समक्ष 15 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विधानसभा द्वारा दोबारा पारित किए गए दस विधेयक भी शामिल हैं।

इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने यह आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि राज्यपाल ने खुद को राज्य सरकार के लिए “राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी” के रूप में पेश किया है। विधेयकों को खारिज किए जाने के बाद, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को विधेयकों को रोकने के लिए राज्यपाल की आलोचना की।

शनिवार को विशेष सत्र के दौरान एआईएडीएमके और बीजेपी समेत विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। उन्होंने पूछा कि जब सरकार पहले ही अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी है तो विधेयकों को फिर से अपनाने के लिए विशेष सत्र क्यों आयोजित किया जा रहा है।

कानून, कृषि और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न विभागों को कवर करने वाले विधेयक, रवि द्वारा 13 नवंबर को लौटाए जाने के मद्देनजर पारित किए गए। पुनः अपनाए गए विधेयकों को बाद में राज्यपाल के पास उनकी सहमति के लिए भेजा गया।

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