संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को भी दोनों सदनों में मणिपुर मुद्दे पर विपक्षी दलों का जबरदस्त विरोध देखने को मिला। सत्र 20 जुलाई को मणिपुर की दो महिलाओं के एक वायरल वीडियो पर आक्रोश के बीच शुरू हुआ। इस मुद्दे पर हंगामे के बीच शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा को स्थगित कर दिया गया था। विपक्ष ने मणिपुर में हुई हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बयान देने और चर्चा की मांग की है। लोकसभा में खुद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष से चर्चा करने की अपील की। हालांकि, लोकसभा को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दूसरी तरफ राज्यसभा में सभापति से तीखी बहस के बाद सांसद संजय सिंह को सदन से पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार मणिपुर मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। अमित शाह ने कहा, “सरकार मणिपुर चर्चा के लिए तैयार है। मैं विपक्ष से अनुरोध करता हूं कि चर्चा होने दें।”
शाह ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष से कहा कि मैं इस पर सदन में चर्चा के लिए तैयार हूं। मैं विपक्ष से अनुरोध करता हूं कि इस मुद्दे पर चर्चा होने दें। यह महत्वपूर्ण है कि देश को इस संवेदनशील मामले पर सच्चाई पता चले। पर पता नहीं क्यों विपक्ष इस मामले पर चर्चा नहीं चाहता।
रक्षा मंत्री और लोकसभा के उप नेता राजनाथ सिंह ने संसद में मणिपुर के विषय पर जारी गतिरोध को खत्म करने के प्रयास के तहत कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से फोन पर बात की। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि रक्षा मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष को रविवार रात फोन किया था, लेकिन खरगे ने स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष मणिपुर के मामले पर सदन में विस्तृत चर्चा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वक्तव्य चाहता है।
राज्यसभा सभापति ने सदन के कामकाज पर सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई। संसद की कार्यवाही को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात की। हंगामे के चलते सोमवार को सभापति ने आप सांसद संजय सिंह को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया है।
संजय सिंह के निलंबन के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने जमकर विरोध दर्ज कराया। भारी हंगामे की वजह से राज्यसभा को भी दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश संजय सिंह से कहा कि मैं आप सांसद से फिर से सदन से बाहर जाने का अनुरोध करता हूं, ताकि सदन की कार्यवाही जारी रह सके।
राज्यसभा से पूरे सत्र के लिए निलंबित किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री सदन में आकर मणिपुर की हिंसा पर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। एक कारगिल के योद्धा की पत्नी को नंगाकर परेड कराया गया। भारत के 140 करोड़ लोगों का सर शर्म से झुक गया है। लेकिन प्रधानमंत्री सदन में आकर जवाब देने के लिए तैयार नहीं है।
आप सांसद राघव चड्ढा ने संजय सिंह के निलंबन पर कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभापति ने संजय सिंह को निलंबित कर दिया। यह सही नहीं है, यह लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। सदन के स्थगित होने के बाद हमने सभापति से मुलाकात की और उनसे निलंबन वापस लेने की अपील की। सभापति को सभी सांसदों को बुलाकर बात करनी चाहिए और स्वस्थ चर्चा करनी चाहिए।
भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा, “हम मणिपुर पर बहस के लिए तैयार हैं लेकिन इसके साथ बिहार में जो लाठीचार्ज हुआ, बंगाल में जो हिंसा हुई, उस पर भी बहस कराने के लिए मैंने नोटिस दिया था और स्पीकर ने उसको स्वीकार कर लिया। आज AAP सांसद संजय सिंह ने जिस प्रकार हंगामा शुरु किया कि मजबूरन सदन को उनको निष्कासित करना पड़ा है। जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो फिर ये(विपक्ष) सदन को क्यों नहीं चलने दे रहे। ”
सदन में जारी हंगामे पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि मुझे लगता है कि मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री द्वारा सदन में उपस्थित होकर मुश्किलों को हल किया जा सकता है। वह खुद भी संसद के सदस्य हैं औऱ इसके प्रति जवाबदेह हैं। थरूर ने कहा कि यह इतना अहम मुद्दा है कि सरकार के मुख्य कार्यकारी से कम कोई भी इस पर शुरुआत में नहीं बोल सकता। प्रधानमंत्री ने संसद के बाहर मीडिया से बात करना उचित समझा लेकिन जब संसद के सत्र चल रहे हैं तो यह अस्वीकार्य है।
सोमवार सुबह विपक्षी सांसदों ने संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले मणिपुर की घटना को लेकर धरना प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रधानमंत्री से घटना को लेकर संसद में बयान देने की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मणिपुर पर बयान दें। सरकार मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो गई है लेकिन विपक्ष प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर अड़ा है।
बीजेपी राजस्थान के सांसदों ने वरिष्ठ नेताओं के साथ संसद भवन में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार और अपराध के मुद्दे पर था। भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने कहा कि हमारा कहना है कि इस समय महिलाओं के साथ अगर कहीं सबसे ज्यादा अत्याचार हुए हैं तो वो राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड में हुए हैं मगर विपक्ष को केवल मणिपुर दिखाई देता है। हमारा कहना है कि मणिपुर में जो भी हुआ वो बेहद दुखद है मगर राजस्थान और अन्य राज्यों में जो भी हुआ वो भी दुखद है। राजस्थान सरकार राज्य में महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रही है।
वहीँ मणिपुर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों सदनों में बयान देने की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन पार्टियों (I.N.D.I.A) ने भी संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लियाकार्जुन खड़गे ने कहा, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री इस मामले पर अपनी बात रखें… अगर 140 करोड़ का नेता बाहर प्रेस से बात करता है और 140 करोड़ जनता के प्रतिनिधी अंदर बैठे हैं, तो आप(प्रधानमंत्री) पहले अंदर अपना बयान दीजिए। उसके बाद हम एक निर्णय लेंगे।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद के दोनों सदनों में एक व्यापक वक्तव्य देना चाहिए। उन्हें लोकसभा और राज्यसभा में प्रासंगिक स्थगन नियमों के तहत चर्चा का पालन करना चाहिए। हमारे प्रदर्शन की यही मांग है।
मालूम हो कि गुरुवार को सत्र शुरू होने के बाद से ही संसद की कार्यवाही मणिपुर हिंसा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में डूबी हुई है। दूसरे दिन भी दोनों सदनों में बमुश्किल कोई कार्यवाही हुई।
