संसद का मानसून सत्र आज यानि 20 जुलाई से शुरू हुआ है जो 11 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सदन में कुल 17 दिनों काम होगा। बुधवार को सोशल मीडिया पर सामने आए मणिपुर हिंसा से जुड़े विभत्स वीडियो पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्ष ने मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह के इस्तीफा और संसद में पीएम मोदी से बयान की मांग की है। मॉनसून सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित हो गई। उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ” नियम 267 के तहत सुबह नोटिस देने के बावजूद मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। आप जानते हैं कि मणिपुर जल रहा है। महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है और उन्हें नंगा घुमाया जा रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं. वह अपना बयान बाहर दे रहे हैं।’
कांग्रेस महासचिव ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा, “1800 घंटे से अधिक की समझ से परे और अक्षम्य चुप्पी के बाद प्रधानमंत्री ने आखिरकार मणिपुर पर कुल 30 सेकंड के लिए बात की। प्रधानमंत्री ने अन्य राज्यों, विशेष रूप से विपक्ष द्वारा शासित राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बराबर करके मणिपुर में भारी शासन विफलताओं और मानवीय त्रासदी से ध्यान हटाने की कोशिश की, जबकि एमपी, यूपी और गुजरात जैसे राज्यों में महिलाओं पर अत्याचारों को नजरअंदाज कर दिया।”
जयराम रमेश ने कहा, “यह बहुत कम है, बहुत देर हो चुकी है। केवल शब्दों से काम नहीं चलेगा। कार्यों को जोर से बोलना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री (अमित शाह) मणिपुर हिंसा पर जवाबदेही से बच नहीं सकते।
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मुझे यह अजीब लगता है कि पीएम संसद के बाहर कुछ ऐसा बोल रहे हैं जो उन्हें अंदर बोलना चाहिए था। मैं उनसे सदन के अंदर अपनी चुप्पी तोड़ने का आग्रह करता हूं। संसद सबसे बड़ा मंच है…जब हमने उनसे मणिपुर के बारे में पूछा, तो वह राजस्थान के बारे में बोल रहे हैं। हर चीज के बारे में बात करें लेकिन शुरुआत मणिपुर से करें…”
लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “हमने स्पष्ट कर दिया है कि हम दोनों सदनों में मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं। मणिपुर एक संवेदनशील मुद्दा है। गृह मंत्री विस्तार से चर्चा का जवाब देंगे। अध्यक्ष को चर्चा की तारीख तय करने दें।”
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “दुर्भाग्य से, विपक्षी दल इसे राजनीतिक रूप से देखते हैं। हमने सदन में कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन वे (विपक्ष) इससे भागना चाहते हैं…ऐसा इसलिए है क्योंकि विपक्ष शासित राज्यों में कुछ मामले हैं। राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं…मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से पूछता हूं – क्या आप सिर्फ एक राज्य में महिलाओं को देखते हैं?…क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और विपक्ष राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर मूकदर्शक बने रहेंगे?…आप महिलाओं के बीच अंतर क्यों करते हैं?…आप महिलाओं के बीच अंतर क्यों करते हैं?… क्या आप ऐसा कर सकते हैं? क्या आप महिलाओं को एक राजनीतिक उपकरण मानते हैं और इसे जारी रखना चाहते हैं?…सोनिया गांधी और राहुल गांधी, आपको राजस्थान पर जवाब देना होगा।”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, “हम इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि पीएम इतने लंबे समय तक चुप थे। हममें से कोई भी इसे समझ नहीं सका। हमें बहुत खुशी है कि उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ी, अब हम चाहेंगे कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद में जाएं… हम चाहते हैं कि जब वह संसद के अंदर बोलें तो इस पर चर्चा करें। उन्होंने संसद के बाहर मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। मुझे बहुत खुशी है, उन्होंने कम से कम अपनी आवाज उठाई है। अब, उन्हें संसद में ही आवाज लाने दीजिए।”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सत्र की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि उनके रवैये से यह स्पष्ट हो गया है कि वे सदन को चलने नहीं देंगे।
राज्यसभा के इतिहास में आज पहली बार उपसभापति के पैनल में 50 फीसदी महिला सांसदों को नियुक्त किया गया है। राज्यसभा सभापति ने आज उपसभापति के पैनल में आठ नये सांसदों को नियुक्त किया है, महत्वपूर्ण ये है कि इस पैनल में चार महिला सांसदों को रखा गया है। राज्यसभा सभापति जगदीप धनकड़ ने जिन महिला सांसदों को पैनल में नॉमिनेट किया है उनमे पीटी उषा, फोजिया खान, फगनों कोंनक, सुलाता देव शामिल है। हालांकि आज राज्यसभा सभापति ने उपसभापति पैनल में 8 नये सांसदों को नियुक्त किया है। महिला सांसदों के अलावा जो चार नये सांसद है उनके विजयसाई रेड्डी, घनश्याम तिवारी, हनुमानताय्या और सूखेन्दु शेखर राय है।
आज सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा में पीएम मोदी ने सोनिया गांधी की सीट के पास जाकर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “जब सत्र शुरू होता है, तो परंपरा के अनुसार, पीएम सभी नेताओं से उनका हालचाल पूछते हैं। इसलिए, उन्होंने मैडम (सोनिया गांधी) से भी मुलाकात की। उन्होंने पीएम से कहा कि हम मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं। मुझे लगता है कि पीएम को उनसे ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी। इसलिए, वह अचंभित हो गए और कहा, “ठीक है, मैं देखूंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि चर्चा होनी चाहिए।”
दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने से पहले आज सुबह विपक्षी दलों ने रणनीति बैठक बुलाई थी, जिसमें 11 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “26 राजनीतिक दलों-भारत ने आज सभी कामकाज स्थगित कर मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग की। पीएम मोदी को बयान देना चाहिए और उनके बयान के आधार पर दोनों सदनों में चर्चा होनी चाहिए लेकिन हमारी मांग को नजरअंदाज कर दिया गया। हम इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।”
मालूम हो कि संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार दिल्ली अध्यदेश समेत 31 बिल पेश कर सकती है। दिल्ली अध्यादेश पर आम आदमी पार्टी पहले ही हमलावर है। 17 और 18 जुलाई को हुई विपक्ष की बैठक में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर आप को अपना समर्थन दिया है। इस मसले पर भी संसद में हंगामे के आसार हैं।
