प्रियंका की प्रतिज्ञा यात्रा से उत्साहित है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ता

मौजूदा दौर में कांग्रेस के लिए 23 अक्टूबर 2021 का दिन एक विशेष दिन बन गया है। कांग्रेस जबरदस्त तरीके से अगले साल ( 2022 ) में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। अगले साल फरवरी – मार्च के महीने में प्रथम चरण में संभावित देश के पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश , उत्तराखण्ड, पंजाब , गोवा और मणिपुर  में विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस की प्राथमिकता का राज्य देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है जहां सत्ता से बाहर हुए कांग्रेस को 30 साल से ज्यादा का समय हो गया।

1989 के बाद इस राज्य  के राजनीतिक समीकरण बुरी तरह से जातीय गानित में उलझ कर रह गए थे जिसकी काट कांग्रेस का कोई भी दिग्गज नेता नहीं कर पाया था। जिसके चलते उत्तर प्रदेश में देश सबसे पुरानी समझी जाने वाली कांग्रेस पार्टी धीरे – धीरे सिमट कर हाशिए पर आ गई। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गाँधी की बेटी और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश मामलों की प्रभारी महासचिव प्रियंका गाँधी के नेतृत्व में यह पार्टी इस राज्य में अपना पुराना गौरव हासिल करने के लिए अनथक प्रयास कर रही है।
कांग्रेस के ये प्रयास कितने सफल होते हैं यह तो आने वाला वक़्त ही बता पायेगा लेकिन यह तय है की प्रियंका की कोशिश उत्तर प्रदेश में पार्टी को राजनीति के हासिये से बाहर धकेलने के बजाय अन्दर लाने में जरूर कारगर साबित होंगे। ये प्रयास कांग्रेस को राज्य की राजनीति में कितना अंदर तक ला पायेंगे इसका पता तो विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने पर ही पता चलेगा लेकिन यह तो तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस  को अब एक नई पहचान अवश्य मिलेगी। इसकी वजह यह है कि नेहरु – गाँधी परिवार की एक संतान के रूप में प्रियंका जमीन से जुड़े लोगों से मिल रही हैं, उनकी आवाज उठा रही हैं और उनके सुख – दुःख में उनके साथ संघर्ष भी कर रही हैं। इससे कांग्रेस के कार्यकर्ता में भी ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
 इस राज्य में कई बरस पहले सब कुछ छोड़ कर घर बैठ चुका पार्टी का कार्यकर्ता आज फिर वैसे ही सत्ता विरोध की राजनीति में सक्रिय हो गया है जैसे 1977 में पहली बार केंद्र की सत्ता से बेदखल होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने विपक्ष की राजनीति के आक्रामक तेवर दिखाए थे। अभी कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश से अपनी इस आक्रामकता की शुरुआत की है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि उत्तर प्रदेश देश का बड़ा राज्य होने के साथ ही कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व  के पितामहों की कार्यस्थली भी रहा है और इस राज्य के विधानसभा चुनाव भी चार महीने के बाद होने ही वाले हैं। कांग्रेस का यह प्रयास सफल रहा तो इसकी पुनरावृत्ति देश के दूसरे राज्यों में भी की जा सकती है। प्रसंगवश कांग्रेस के लिए 23 अक्टूबर 2021 का दिन इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसी दिन कांग्रेस ने  उत्तर प्रदेश विधन्सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रियंका  गाँधी के नेतृत्व में राज्य में तीन प्रतिज्ञा यात्राओं को हरी झंडी दिखाई। ये तीन प्रतिज्ञा यात्राएं राज्य के वाराणसी, बाराबंकी और सहारनपुर से शुरू की गयीं हैं। इन यात्राओं का समापन स्वर्गीय प्रधानमंत्री और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष इंदिरा गाँधी की पुण्य तिथि के दिन 31अक्टूबर को होगा। बाराबंकी से शुरू की गयी प्रतिज्ञा यात्रा को खुद  प्रियंका गाँधी ने ही रवाना किया था।
इस यात्रा को रवाना करने से से पहले प्रियंका गांघी ने सात प्रतिज्ञाओं की घोषणा की थी जिसके मुताबिक  : “चुनाव में कांग्रेस महिलाओं के लिए 40प्रतिशत टिकट सुरक्षित रखेगी , विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी की सरकार बनने पर , ” कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्मार्ट फ़ोन और स्कूटी दी जायेगी “. “किसानों का कर्जा माफ़ , 2500 में गेहूं – धान , 400पायेगा गन्ना किसान “,” बिजली बिल सबका हाफ , कोरोना काल का कर्जा माफ़ “, ” दूर करेंगे कोरोना की मार , परिवार को देंगे 25 हजार “,देंगे 20  लाख युवाओं को देंगे सरकारी रोजगार ” और अंत में , “हम यह वचन निभायेंगे “इस कथन के साथ प्रियंका गाँधी ने बाराबंकी से कांग्रेस की प्रतिज्ञा यात्रा को रवाना किया।

 प्रतिज्ञा यात्रा के तहत उत्तर प्रदेश में चार यात्राओं के माध्यम से राज्य के 12 हजार किलोमीटर क्षेत्र को नजदीक से समझने, स्थानीय लोगों से मिलने और उनके साथ संवाद का मौका मिलने के साथ ही इन इलाकों की समस्याओं को जानने का मौका भी पार्टी कार्यकर्ताओं को मिलेगा। अभी तीन प्रतिज्ञा यात्राओं के माध्यम से राज्य के अवध बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन  क्षेत्रों को कवर करने की योजना है। तीनो यात्राएं 31 अक्टूबर को गोरखपुर में होने वाली प्रियंका गांधी की बड़ी रैली तक पूरी कर ली जायेंगी। प्रियंका की इस रैली को सफल बनाने की तैयारी भी बड़ी जोर – शोर से चल रही है। इस वजह से फिलहाल तीन यात्राओं का कार्यक्रम तैयार हुआ हैजो बुंदेलखंड क्षेत्रपश्चिमी यूपी क्षेत्र और अवध क्षेत्र में 23 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चलेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में यात्रा गोरखपुर रैली के बाद निकाली जाएगी।

 

 

योजना के मुताबिकबुंदेलखंड क्षेत्र में यह यात्रा बाराबंकी से लखनऊउन्नावफतेहपुरचित्रकूटबांदाहमीरपुरजालौन होते हुए झांसी में जाकर खत्म होगी। इसी तरह पश्चिम यूपी क्षेत्र में सहारनपुर,मुजफ्फरनगरबिजनौरमुरादाबादरामपुरबरेली, बदायूंअलीगढ़हाथरसआगरामथुरा तक यात्रा चलेगी।

 

 

अवध क्षेत्र में यह यात्रा वाराणसी से शुरू होगी और चंदौलीसोनभद्रमिर्जापुरप्रयागराजप्रतापगढ़अमेठी होते हुए रायबरेली में जा कर खत्म होगी। इस दौरान प्रियंका गांधी की सभाएं भी होंगी। यूपी चुनाव को लेकर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकी हुई है। महिला मतदाताओं को केंद्र में रख कर इस राज्य में अपनी राजनीतिक साख की वापसी के साथ पार्टी ने पुराने वोट बैंक तक पहुँचने की योजना के तहत ही यह अभियान चलाया है।

 

 

प्रियंका का यह अभियान एक तरह से राजनीति में महिला सशक्तिकरण के नारे को ही ताकत देने वाला है। इसीलिए इसे

“मैं लड़की हूँ  .. लड़ सकती हूँ “  के रूप में परिभाषित भी किया है देखना है यह कितना सफल होता है ! 

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